31 मार्च तक बनाएं तेजाब बिक्री नीति : हाई कोर्ट

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Tuesday, December 03, 2013-7:01 PM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आज सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे अगले 31 मार्च तक तेजाब की बिक्री और दूसरे क्षयकारी पदार्थो की बिक्री के लिए नीति बनाएं। ताकि इसके दुरूपयोग को रोका जा सके।

न्यायमूर्ति आर.एम.लोढ़ा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से तेजाब हमले की पीड़ितों को प्लास्टिक सर्जरी सहित अन्य सभी तरह के उपचार को नि:शुल्क उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है।

उन्होने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केन्द्र शासित प्रदेश के सभी प्रशासकों को 18 जुलाई के आदेश के तहत दिये गये निर्देशों पर अमल करने और तेजाब की बिक्री को नियंत्रित करने और केन्द्र सरकार के नियमों के अनुरूप 31 मार्च, 2014 तक नियम तैयार करने का निर्देश दिया है।

देश में महिलाओं पर तेजाब के हमलों की घटनाओं पर अंकुश लगाने के इरादे से शीर्ष अदालत ने इससे पहले इसे गैर जमानती अपराध बनाने और पीड़ित के लिये मुआवजे की राशि बढ़ाकर तीन लाख रुपए करने का भी निर्देश दिया था।
 
न्यायालय ने कहा था कि तेजाब जैसे पदार्थ की खरीद बिक्री के लिये प्रशासन फोटो पहचान पत्र जारी करेगा और इस पदार्थ की बिक्र ी 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को नहीं की जायेगी। न्यायालय तेजाब के हमले से राजधानी मे 2006 में जख्मी नाबालिग बच्ची लक्ष्मी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। न्यायालय ने तेजाब की बिक्री सहित इससे संबंधित विभिन्न मुद्दों पर कई निर्देश भी दिये थे।

वहीं वकील अपर्णा भट्ट ने अदालत को बताया कि बिहार, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी को छोड़ कर किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित आदर्श नियमों के आधार पर तेजाब बिक्री को नियंत्रित करने के लिए दिशा निर्देश तैयार नहीं किए हैं।

अपर्णा भट्ट ने कहा कि ये दिशा निर्देश केंद्र द्वारा तैयार मॉडल पर आधारित हैं। वकील के इस तर्क के बाद जस्टिस आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने चार महीने की अतिरिक्त मोहलत दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को भी हिदायत दी है कि वह इस तरह के हमले की सूचना फौरन सब डिविजनल मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी को दें ताकि वह पता लगा सके कि तेजाब किस तरह खरीदा गया था।

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