PM का मोदी पर पलटवार कहा, विरोधी को हल्के से नहीं ले सकते

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Friday, December 06, 2013-5:26 PM

नई दिल्ली:  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी पार्टी के उन लोगों से आज असहमति जताई जो नरेन्द्र मोदी की ओर से पेश चुनौतियों को खारिज करते हैं और कहा कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों से इतर उनकी पार्टी 2014 के चुनाव में आत्मविश्वास के साथ जाएगी।

मनमोहन ने कहा, ‘‘एक संगठित पार्टी के तौर पर हम सत्ता पलटने की विपक्ष की ताकत को कम कर के नहीं आंक सकते। इसलिए मैं उनलोगों में से एक हूं जो अपने विरोधियों को बहुत गंभीरता से लेते हैं। ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है।’’  प्रधानमंत्री यहां 11वें हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट को संबोधित करने के बाद सवालों का जवाब दे रहे थें  इससे पहले, अपने संबोधन में मनमोहन ने उन लोगों की आलोचना की जो समूचे राजनीतिक वर्ग पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाते हैं और कटुता फैलाते हैं।

मनमोहन ने लोगों से ‘‘बड़ी तस्वीर’’ देखने पर जोर देते हुए कहा, ‘‘पिछले दो साल के दौरान, कुछ अच्छे और सरोकारी नागरिकों ने समूचे राजनीतिक वर्ग पर भ्रष्ट एवं जनविरोधी होने का आरोप लगा कर कलह फैलाने की कोशिश की। अनेक यह कहने लगे कि लोकतंत्र ने भारत में ठीक से काम नहीं किया। उन्होंने संसद के फैसले का सम्मान करने से इनकार कर संसद की संस्था पर हमला किया।’’ एग्जिट पोल में दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की भविष्यवाणी की गई है। 

चुनावी भविष्यवाणी से इतर प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ कांग्रेस पार्टी आत्मविश्वास की भावना से चुनाव में जा रही है और विधानसभा चुनाव के नतीजे चाहे जो भी हों, उससे भ्रमित नहीं होना चाहिए।’’   मनमोहन ने कहा कि वह भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को ‘‘बहुत गंभीरता’’ से लेते हैं और उसमें लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।   मनमोहन ने यहां हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘राजनीतिक पार्टी होने के नाते हम शासन की बागडोर अस्थिर करने की विपक्ष की शक्ति को कम कर के नहीं आंक सकते।’’

  प्रधानमंत्री ने यह बात तब कही जब उनसे उनके कैबिनेट सहयोगियों के विभिन्न मतों के बारे में पूछा गया जिनमें से एक राय यह थी कि मोदी की तरफ से पेश चुनौती को गंभीरता से लिया जाना चाहिए जबकि दूसरी राय ने विपक्ष को खारिज कर दिया था। मनमोहन ने कहा, ‘‘मैं उन लोगों में से हूं जो अपने विरोधियों को बहुत गंभीरता से लेते हैं। ढिलाई के लिए कोई गुंजाइश नहीं हैै।’’ मनमोहन ने इस सवाल को खारिज कर दिया जिसमें पूछा गया था कि क्या सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक वोट बटोरने का कोई शिगुफा है। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि अगर दंगों को रोका नहीं जा सकता है तो पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से वोट बटोरने वाला कोई शिगुफा नहीं है। मैं समझता हूं कि पिछले पांच या छह साल में हम अपने देश के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक दंगों की समस्या का सामना कर रहे हैं...’’   प्रधानमंत्री ने सांप्रदायिक हिंसा विधेयक के बुनियादी उसूलों की व्याख्या करते हुए कहा, ‘‘अगर दंगों को नहीं रोका जा सकता, दंगों के पीड़ितों के लिए पर्याप्त मुआवजा होना चाहिए।’’

मनमोहन ने कहा, ‘‘मुजफ्फरनगर में और हमारे देश के कुछ अन्य हिस्सों में जो कुछ हुआ वह याद कराता है कि हालांकि एक देश के नाते हम देश के सभी लोगों की रक्षा करने में अपनी क्षमता पर गर्व कर सकते हैं, ऐसे भी समय हैं जब विकृतियां होती हैं।’’  प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘अगर संसद में पारित हो जाता है तो यह विधेयक उन विकृतियों को नियंत्रित करने में मदद करेगा।’’  प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया, ‘‘ मैं समझता हूं कि पिछले पांच या छह साल में हम अपने देश के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक दंगों की समस्या का सामना कर रहे हैं...’’    मनमोहन ने कहा, ‘‘और हमारा प्रयास ऐसा माहौल पैदा करना रहा है जहां अधिकारी उस हद तक प्रभावी रूप से कानून-व्यवस्था स्थिति की देख रेख के लिए जिम्मेदार हों जिस हद तक मानव के रूप में संभव है।’’   उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही, अगर दंगों को नहीं रोका जा सकता, दंगों के पीड़ितों के लिए पर्याप्त मुआवजा होना चाहिए।’’  

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ये दो बुनियादी उसूल हैं जो रेखांकित करते हैं कि सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का उद्देश्य क्या है। मैं समझता हूं कि यह एक विधेयक है जिसका वक्त आ चुका है।’’   उनकी यह टिप्पणी यह सुनिश्चित करने के लिए कई प्रावधानों को हटाने के केन्द्र के कदम के बीच आई कि समुदायों के बीच कानून निरपेक्ष हो। कई राज्यों की शिकायत थी कि इस विधेयक से उनके कई अधिकारों का अतिक्रमण हो रहा है।
 


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