अंदरूनी उठापटक से हुई कांग्रेस की दुर्गति

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Tuesday, December 10, 2013-1:32 PM

नई दिल्ली : रविवार को चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हमें आम आदमी पार्टी से सीखने की जरूरत है। राहुल के इतना कहने भर की देर थी कि बुजुर्ग कांग्रेसी सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कह दिया कि आप से राहुल सीखें, हमें सीखने की जरूरत नहीं है।

गौरतलब है चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद पहले सोनिया और फिर राहुल ने मीडिया के सामने आकर  पार्टी की हार स्वीकार की थी। राहुल ने यह भी कहा था कि आम आदमी पार्टी शायद जनता से जितना जुड़ी है, उतना राष्ट्रीय पार्टियां नहीं।

इसी में उन्होंने आगे जोड़ा था कि हमें (कांग्रेस पार्टी को) अरविंद केजरीवाल से सीखने की जरूरत है। इतना सुनना भर था कि पुराने कांग्रेसी और राज्यसभा में मध्य प्रदेश से आने वाले सत्यव्रत चतुर्वेदी ने केवल राहुल को ही अरविंद से सीखने की सलाह दे डाली। यानी इतनी दुर्गति के बाद भी पार्टी आत्ममंथन की बता तो करती है, विपक्षी क्यों और कैसे लड़े, उसे देखने और उससे सीखने की जरूरत नहीं समझती।

केवल सत्यव्रत ही नहीं, पार्टी के महासचिव जर्नादन द्विवेदी ने जिस अंदाज में दिल्ली में सरकार और संगठन के बीच खाई का जिक्र किया, वह चौंकाने वाला था। द्विवेदी ने यह बात गुस्से में और इस अंदाज में कही, मानो इसके लिए कोई और जिम्मेदार हो।

दिल्ली में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और प्रदेश अध्यक्ष जय प्रकाश अगवाल के बीच तनाव को स्वीकार करने के उनके तरीके पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस समस्या को अगर चुनाव से पहले ठीक किया जाता तो शायद पार्टी की यह दुर्गति नहंी होती। कांग्रेस की सोच क्या है, यह इससे भी साबित हो जाता है कि मतदान से दो दिन पहले तक जो शीला यह पूछ रही थी कि अरविंद केजरीवाल चीज क्या है, और उस नाचीज को तो मीडिया ने चीज
बना दिया।

चुनाव के नतीजे आने के बाद शीला ने सोमवार को अपना सुर बदलते हुए कहा कि केजरीवाल मुझसे ज्यादा समझदार हैं। हालांकि जर्नादन द्विवेदी के रविवार के बयान से इतर उन्होंने कहा कि मुझे पार्टी से उतना समर्थन नहीं मिला, जितना मिलना चाहिए था और हार के लिए उनसे ज्यादा पार्टी जिम्मेदार है।

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