लोकपाल विधेयक पर 'आप' व अन्ना के भिन्न-भिन्न राग

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Monday, December 16, 2013-2:45 PM

नई दिल्ली/रालेगण सिद्धि: संसद में विचाराधीन लोकपाल विधेयक पर सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे और उनकी पूर्व सहयोगी अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) के बीच उभरा मतभेद रविवार को और गहरा होकर सतह पर आ गया। हजारे ने कहा कि यदि जरूरी हो तो सरकार लोकपाल विधेयक को हंगामे के बीच भी पारित करे और बद में संशोधन पेश करे। आप ने विचाराधीन विधेयक को यह कहते हुए खाजिर किया कि इससे भ्रष्टाचार नहीं रुकेगा, बल्कि यह ‘भ्रष्टाचारियों को संरक्षण’ देगा।

अपने गांव रालेगण सिद्धि में उपवास कर रहे अन्ना हजारे ने कहा, ‘‘मैं कहना चाहूंगा कि यदि कुछ पार्टियां व्यवधान पैदा कर रही हैं तो हंगामे में विधेयक पारित करें, कई विधेयक इस प्रकार के हंगामे में पारित किए जा चुके हैं। यदि जरूरत हो तो सरकार सत्र विस्तार करे।’’ विधेयक के बारे में अरविंद केजरीवाल की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर हजारे ने कहा, ‘‘मैंने विधेयक को पढ़ा है, शायद उन्होंने नहीं पढ़ा है।’’ केजरीवाल ने कहा था कि अन्ना को इसके प्रावधानों की जानकारी नहीं है।

यहां कंस्टीट्यूशन क्लब में आप सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा, ‘‘इस लोकपाल विधेयक में लोकायुक्तों के गठन का प्रावधान नहीं है, इसमें खुलासा करने वालों की हिफाजत करने का प्रावधान नहीं है, और यह सरकार से मुक्त नहीं है।’’ प्रशांत भूषण ने कहा, ‘‘यदि यह विधेयक भ्रष्टाचार रोकने में असमर्थ है तो फिर इसे पारित करने का क्या मतलब है?’’ उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भ्रष्ट लोगों को बचाएगा। आप नेता अरविंद केजरीवाल ने इस बीच कहा कि इस विधेयक में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को आजादी नहीं दी गई है।

केजरीवाल ने कहा, ‘‘वे इस विधेयक में सीबीआई को स्वतंत्र नहीं कर रहे हैं। यदि सीबीआई स्वतंत्र हो जाए तो प्रधानमंत्री भी 2जी या कुछ अन्य घोटालों में जेल जा सकते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह विधेयक कांग्रेस और उसके उपाध्यक्ष राहुल गांधी को वाहवाही बटोरने में लाभ पहुंचाएगा।’’ हाल के दिल्ली विधानसभा चुनाव में उल्लेखनीय मुकाबले में आश्चर्यजनक जीत हासिल करने वाले केजरीवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। केजरीवाल ने कहा, ‘‘हमारी पार्टी के सदस्य देश के विभिन्न हिस्सों में जाएंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में अलख जगाएंगे।’’

केजरीवाल के पार्टी गठित करने के बाद अन्ना ने उनसे नाता तोड़ लिया और अपनी राह पकड़ ली। लोकपाल विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है और राज्यसभा की प्रवर समिति ने उसमें काफी संशोधन किए, और शुक्रवार को इस विधेयक को बहस के लिए राज्यसभा में पेश किया गया। राज्यसभा में विधेयक पारित हो जाने के बाद मंजूरी के लिए उसे लोकसभा में भेजा जाएगा। सरकार ने कहा है कि वह विधेयक को इसी सत्र में पारित करने के लिए वचनबद्ध है। संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को समाप्त हो रहा है।


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