जस्टिस गांगुली बोले, ‘मेरी तो कोई सुनता ही नहीं’

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Tuesday, December 17, 2013-6:49 AM

नई दिल्ली : लॉ इंटर्न के साथ यौन शोषण करने का आरोप झेल रहे जस्टिस ए.के. गांगुली ने पहली बार खुलकर बोला है। उन्होंने अडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जय सिंह को निशाने पर लिया है। इंदिरा जय सिंह की ओर से विक्टिम के हलफनामे का ब्योरा जारी किए जाने पर जस्टिस गांगुली ने सख्त ऐतराज जताया है। इस पर जस्टिस गांगुली ने बड़ा सवाल उठाया है। जस्टिस गांगुली ने कहा है, यह (हलफनामा) सुप्रीम कोर्ट की कमिटी को सौंपा गया था। यह बेहद गोपनीय दस्तावेज माना जाता है। यह दस्तावेज सार्वजिनिक कैसे हो गया। इस बीच वेस्ट बंगाल ह्यूमन राइट्स कमिशन के चेयरमैन के पद से जस्टिस गांगुली के इस्तीफे की मांग ने और जोड़ पकड़ ली है।

जब जस्टिस गांगुली से यह पूछा गया कि क्या वह इस (हलफनामा लीक होने के बारे में) बारे में शिकायत करेंगे तो उन्होंने कहा, मैं क्या कर सकता हूं? मेरी तो कोई सुनता ही नही ? हालांकि, जब गांगुली से विक्टिम के हलफनामे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, मैं इस बारे में कुछ भी नहीं कहूंगा।

कोलकाता लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई करने वाली छात्रा ने सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की कमिटी के सामने पेश होकर अपना हलफनामा दिया था। इंटर्न ने उन पर पिछले साल दिल्ली में एक होटेल में यौन उत्पीडऩ करने का आरोप लगाया है।

हालांकि, देश के चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम ने जस्टिस गांगुली के खिलाफ किसी कार्रवाई से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि चूंकि जस्टिस गांगुली रिटायर हो चुके हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कुछ भी नहीं कर सकता है।


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