बॉलीवुड में ‘तमंचे पे डिस्को’ और ‘लुंगी डान्स’ का तड़का, नहीं रहे मन्ना डे

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Monday, December 23, 2013-11:39 AM

नई दिल्ली: बॉलीवुड के संगीत ने इस साल जहां एक ओर सुरीली धुनों को छुआ वहीं ‘तमंचे पे डिस्को’ और ‘लुंगी डान्स’ जैसे गीतों का जादू भी युवाओं के सर चढ़ कर बोला। हालांकि इसी साल 24 अक्तूबर को सुरों की एक पूरी दुनिया रचने वाले प्रख्यात पाश्र्व गायक मन्ना डे को बॉलीवुड ने खो दिया। वर्ष 2013 में लोगों को ‘खून चूस ले’, ‘तूह’, ‘लुंगी डान्स’ और ‘तमंचे पे डिस्को’ जैसे गीतों के साथ ही सुरीले गीत ‘तुम ही हो’, ‘संवार लूं’ जैसे गीत भी पसंद आए।

साल के पसंदीदा एलबम में ‘गो गोवा गॉन’ बाजी मार गया। इसमें संगीतकार सचिन जिगर के गीत ‘खून चूस ले’ तथा प्रवचन भरे अंदाज वाला ‘बाबाजी की बूटी’ लोगों ने बहुत पसंद किया। फिल्म ‘गोरी तेरे प्यार में’ में करीना पर फिल्माया गया गीत ‘चिंगम चबाके’ और शादियों का मौसम बताने वाला ‘तूह’ भी लोकप्रिय हुआ। विशाल शेखर के अलबम ‘धत तेरी की’ के गीत भी लोकप्रिय हुए। इस साल अभिनेता शाहिद कपूर की फिल्में भले ही हिट न हुई हों पर उनके गीत खासे पसंद किए गए। खास कर फिल्म ‘फटा पोस्टर निकला हीरो’ का गीत ‘खाली पीली टोकने का नहीं’ खूब चला। उनकी नई फिल्म ‘आर राजकुमार’ में प्रीतम का संगीतबद्ध किया गीत ‘गंदी बात’ और ‘साड़ी के फाल सा’ खासा पसंद किया गया।

रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोण अभिनीत ‘ये जवानी है दीवानी’ का संगीत युवा पीढ़ी को दीवाना बना गया और उनके कदम ‘बदतमीज दिल’ पर थिरकने से नहीं रूकते। फिल्म में प्रीतम के संगीतबद्ध किए गए अन्य गीत ‘बलम पिचकारी’, ‘दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड’, ‘घाघरा वाया आगरा’ और लोकगीत की झलक बताता ‘नौटंकी’ भी युवाओं की पसंद बना। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘रामलीला’ में लोकगीतों और अटपटे शब्दों वाले गीतों का संगम मिला। फिल्म के ‘इश्किया ढिश्कियां’, ‘तत्तड़ तत्तड़’ और ‘राम चाहे लीला’ गीत हर जगह सुनाई दिए।अटपटे शब्दों वाले गीत इस साल खूब चले। ‘घनचक्कर’ का ‘लेजी लैड’ और ‘मटरू की बिजली का मनडोला’ का ‘ओय बॉय चार्ली’, ‘बुलेट राजा’ का ‘तमंचे पे डिस्को’ और ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ का ‘लुंगी डान्स’ गीत लोगों की पसंद बन गए।

महेश भट्ट की ‘आशिकी 2’ के गीत ‘सुना रहा है ना तू’, ‘तुम ही हो’, ‘चाहूं मैं या ना’ ने पुराने सुरीले दौर की याद दिला दी। मोहित सूरी निर्देशित इस फिल्म के लिए संगीत जीत गांगुली, मिठुन और अंकित तिवारी ने दिया। फिल्म के 11 गीतों में से छह को स्वर अरिजीत सिंह ने दिया। विक्रमादित्य मोटवानी की ‘लुटेरा’ ने भी सुरीले संगीत की तान छेड़ी। फिल्म के गीत अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे और संगीत अमित त्रिवेदी का है। फिल्म के गीत ‘संवार लूं’ की सरगम और ‘मोंटा रे’ का बंगालीपन खूब सराहा गया। आनंद एल राय की ‘रांझणा’ से ए आर रहमान की वापसी हुई। फिल्म के गीत ‘तुम तक’ को लोगों ने लाजवाब कहा। सुखविंदर और शीराज उप्पल के गाए शीर्षक गीत में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय और पश्चिमी संगीत की झलक मिली।

अमित त्रिवेदी की एक अन्य फिल्म ‘काई पो चे’ के गीत ‘मांजा’ और ‘मीठी बोलिया’ भी श्रोताओं को खूब अच्छे लगे। ‘एक थी डायन’ के लिए गुलजार का लिखा और विशाल भारद्वाज का संगीतबद्ध गीत ‘यारम’ भी चला। ‘फुकरे’ फिल्म में सोना महापात्र की कच्ची सी आवाज में गाया  गीत ‘अंबर सरिया’ वास्तव में एक पुराने पंजाबी लोक गीत का बदला रूप है जिसे सराहना मिली। इनके अलावा ‘रेस 2’ का ‘बेइंतिहां’, ‘ये जवानी है दीवानी’ का ‘सुभानअल्ला’ और ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ का ‘तितली’ भी लोकप्रिय हुए।

एक ओर जहां बॉलीवुड में नए गीतों की धूम मचती रही वहीं बीते दौर में श्रोताओं को हिन्दी और बांग्ला सहित अनेक भाषाओं में 3,500 से अधिक गीतों की सौगात देने वाले मन्ना डे का 24 अक्तूबर को निधन हो गया। कोलकाता में वर्ष 1919 में जन्मे मन्ना डे ने मुंबई में 50 साल से अधिक समय बिताया था। प्रतिष्ठित दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित मन्ना डे पिछले कई वर्षों से बेंगलूर में रह रहे थे। मन्ना डे की आवाज कई पीढिय़ों की पसंदीदा रही। उन्होंने न केवल रागों पर आधारित गीत गाए बल्कि कव्वाली और तेज संगीत वाले गीतों को भी अपनी आवाज से सजाया। मन्ना डे के गाए कुछ गीतों ‘‘पूछो न कैसे मैने’’ (मेरी सूरत तेरी आंखें), ‘‘ऐ मेरी ज़ोहरा ज़बीं’’ (वक़्त), ‘‘जि़ंदगी कैसी है पहेली’’ (आनन्द), ‘‘ये दोस्ती’’ (शोले), ‘‘इक चतुर नार’’ (पड़ोसन) और ‘‘लागा चुनरी में दाग’’ (दिल ही तो है) का जादू आज भी उनके चाहने वालों के सर चढ़ कर बोलता है।


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