यूपी में स्मारक घोटाला: उठेगा सच से पर्दा, मुश्किल में माया

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Tuesday, January 07, 2014-10:34 AM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार में हुए स्मारक घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस निर्माण निगम व लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को शीघ्र ही नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब करेगी। पूछताछ में विजिलेंस उन्ही अधिकारियों को बुलायेगी जिनकी मिर्जापुर सैंड स्टोन की दरें निर्धारित करने में अहम भूमिका थी। विजिलेंस की पूछताछ में उन्हें यह बताना पड़ेगा कि उन्होंने पत्थरों की दरें तय करने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनायी। साथ ही इसके दस्तावेजी सुबूत भी उन्हें उपलब्ध कराने पड़ेंगे। पहले दौर की पूछताछ में करीब 26 अधिकारियों को बुलाने की तैयारी है। स्मारक घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस सबसे पहले यह पता लगाने की कोशिश में है कि आखिर मिर्जापुर सैंड स्टोन की दरें किस तरह तय की गयी। इस बाबत ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया था कि जुलाई 2007 में इस काम के लिए निर्माण निगम व एलडीए के 22 अधिकारियों की टीम बनायी गयी थी। इनमें निगम के चेयरमैन व परियोजना प्रबंधक एके गौतम, अपर परियोजना प्रबंधक राजीव गर्ग, राकेश चन्द्र, एके सक्सेना, बीडी त्रिपाठी, एसपी गुप्त, राजेश चौधरी, इकाई प्रभारी केआर सिंह, पीके शर्मा, एसपी सिंह, एचएस तरकर, हीरालाल, एसके शुक्ल, वित्तीय परामर्शदाता वीके मुद्गल, जीएम तकनीकी एसके त्यागी, जीएम सोडिक कृष्ण कुमार, जीएम सेंट्रल जोन एस कुमार, एलडीए के मुख्य अभियंता त्रिलाकी नाथ, अधिशासी अभियंता विमल सोनकर, महेन्द्र सिंह गुरुदत्ता, आरके शुक्ल व अधीक्षण अभियंता व संयुक्त निदेशक एसबी मिश्र शामिल थे।

गौरतलब है कि ईओडब्ल्यू ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि खनन निदेशालय की पत्रावलियों में नौ जुलाई 2007 की एक नोटिंग मिली। जिसमें मंत्री द्वारा सैंड स्टोन की पिंक वैरायटी को पसंद किये जाने का जिक्र है। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि 18 जुलाई 2007 को मिर्जापुर सैंड स्टोन खरीदने के लिए दरें निर्धारित करने को चार सदस्यीय संयुक्त क्रय समिति का गठन किया गया। इसमें निर्माण निगम के अपर परियोजना प्रबंधक राकेश चन्द्रा, एके सक्सेना, इकाई प्रभारी केआर सिंह व सहायक स्थानिक अभियंता राजीव गर्ग शामिल थे। इस समिति ने स्मारकों में लगाने के लिए पत्थर की कीमत 170 रुपये प्रति घन फुट तय की। इसके छह महीने बाद 28 फरवरी को एक बैठक हुई। जिसमें निर्माण निगम, एलडीए व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। निर्माण निगम की ओर से प्रबंध निदेशक सीपी सिंह, परियोजना प्रबंधक एसपी गुप्त, पीके जैन, एसके अग्रवाल, आरके सिंह, बीडी त्रिपाठी, राकेश चन्द्रा, मुकेश कुमार, एसके सक्सेना, हीरालाल, एसके चौबे, इकाई प्रभारी एसपी सिंह, एसके शुक्ल व मुरली मनोहर मौजूद थे। ईओडब्ल्यू ने अपनी रिपोर्ट में मंडलायुक्त लखनऊ, एलडीए व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के शामिल होने की पुष्टि तो की लेकिन उनके नाम नहीं दिये। इसी बैठक में मिर्जापुर सैंड स्टोन को 150 रुपये प्रति घन फुट की दर से खरीदने का फैसला लिया गया। ईओडब्ल्यू ने माना कि इस बैठक में सरकारी धन के गबन की साजिश रचते हुए पत्थरों के दोगुने रेट तय किये गये।
 


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