सोशल मीडिया में केजरीवाल पर हमले

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Tuesday, January 07, 2014-5:30 PM

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी ने सरकार बनने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 20 हजार लीटर पानी मुफ्त देने का बड़ा ऐलान किया था। जलबोर्ड से सम्बंधित बड़े फैसले लेने में सरकार अभी भी लगी है और सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री ने जलबोर्ड से सम्बंधित एक और बड़ा फैसला लिया।दिल्ली जल बोर्ड में सेवा निष्पादन गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए लगभग 800 कर्मचारियों का तबादला किया गया हैं। इस आदेश के बाद जलबोर्ड के कर्मचारियों में खलबली मची हुई है। एक न्यूज चैनल द्वारा किए स्टिंग में आर.टी.ओ. सहित जलबोर्ड में रिश्वतखोरी की बात सामने आई थी। इस स्टिंग पर कार्रवाई करते हुए जलबोर्ड के 3 कर्मचारियों को सस्पैंड भी कर दिया गया है। 

आप की सरकार का जोर  सबसे ज्यादा दिल्ली को पानी और बिजली की सस्ती और गुणवत्ता युक्त उपलब्धता पर है। इसका असर दिखाई भी देने लगा है। जलबोर्ड द्वारा प्रति माह 20 हजार लीटर पानी मुफ्त पहले ही दिए जाने का ऐलान किया जा चुका है। इस बड़े फैसले के बाद सोमवार को अब एक साथ  रिकॉर्ड तोड़ 800 कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया। जलबोर्ड ने उपभोक्ताओं को अपनी सेवाओं में गुणवत्ता देने के लिए एक ही स्थान पर सालों से जमे कर्मचारियों को हटाकर दूसरे स्थानों पर तबादला कर दिया गया है।

दिल्ली जल बोर्ड ने सेवा वितरण बिन्दु पर अपनी सेवाआें को कारगर बनाने के लिए लगभग 800 कर्मचाारियों के तबादले के आदेश अरविंद केजरीवाल के बड़े सरकारी बंगले का मुद्दा अंग्रेजी के एक अखबार ने उठाया तो इसे सबसे पहले भाजपा ने लपका और विधानसभा में जोर-शोर से उठाया।इसके लिए भाजपा के इंटरनेट पर सक्रिय विंग ने भी अपना काम जोरदार तरीके से किया। हजारों की संख्या में फेसबुक और ट्विटर पर घोस्ट आई.डी. बना दी गई हैं जो सिर्फ ये ही काम कर रही हैं कि कैसे आप को घेरा जाए। अगर हैशटैग अरविंद केजरीवाल के नाम से ट्विटर पर चल रहे ट्रेंडस पर आप गौर करें तो तमाम ऐसे ट्वीट पड़े मिल जाएंगे जो आप और केजरीवाल पर हमलावर नजर आएंगे। इनमें से कुछ केजरीवाल को झूठा, धोखेबाज और न जाने क्या-क्या कहते मिल जाएंगे।

कुछ मुद्दों को लेकर आप की ओर से निर्णय लेने में हो रही देरी पर भी भाजपा का ये विंग खासा हमला कर रहा है। यहां तक की अरविंद केजरीवाल एंड पार्टी की कामयाबी की सराहना करने वालों को पेड मीडिया की श्रेणी में रखा जा रहा है। ट्विटर पर केजरीवाल को सलाह दी जा रही है कि अगर आप कार्रवाई नहीं कर सकते तो मनमोहन सिंह मत बनो और इस्तीफा दे दो। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जिस दिन ट्विटर पर हैशटैग आप, हैशटैग अरविंद केजरीवाल या हैशटैग योगेंद्र यादव ट्रेंड न कर रहे हों। प्रति मिनट 70 से 80 ट्वीट्स आ रहे हैं। ट्विटर पर एक हैंडल तो थूक कर चाटो-आप, के नाम से बना दिया गया है।

दिन भर इस हैंडल से तमाम ऐसे ट्वीट आ रहे हैं तो आम आदमी पार्टी पर हमला कर रहे हैं। इस हैंडल के ट्वीट्स पर गौर करें तो इसका एकमात्र उद्देश्य ये ही नजर आता है कि कैसे ये साबित किया जाए कि आप सरकार वायदों को पूरा करने में किस तरह से विफल साबित हो रही है। द घंटा टाइम्स, नाम का एक हैंडल तो प्रशांत भूषण की तुलना दिग्विजय सिंह से कर रहा है। यहां आप और कांग्रेस को  एक साथ निशाना बना दिया जा रहा है। योगेंद्र यादव को तो सोशल मीडिया पर आलोकनाथ आफ पॉलिटिक्स कहा जा रहा है।

अरविंद केजरीवाल के बड़े सरकारी बंगले का मुद्दा अंग्रेजी के एक अखबार ने उठाया तो इसे सबसे पहले भाजपा ने लपका और विधानसभा में जोर-शोर से उठाया। इसके लिए भाजपा के इंटरनेट पर सक्रिय विंग ने भी अपना काम जोरदार तरीके से किया। हजारों की संख्या में फेसबुक और ट्विटर पर घोस्ट आई.डी. बना दी गई हैं जो सिर्फ ये ही काम कर रही हैं कि कैसे आप को घेरा जाए।अगर हैशटैग अरविंद केजरीवाल के नाम से ट्विटर पर चल रहे ट्रेंडस पर आप गौर करें तो तमाम ऐसे ट्वीट पड़े मिल जाएंगे जो आप और केजरीवाल पर हमलावर नजर आएंगे। इनमें से कुछ केजरीवाल को झूठा, धोखेबाज और न जाने क्या-क्या कहते मिल जाएंगे। कुछ मुद्दों को लेकर आप की ओर से निर्णय लेने में हो रही देरी पर भी भाजपा का ये विंग खासा हमला कर रहा है। यहां तक की अरविंद केजरीवाल एंड पार्टी की कामयाबी की सराहना करने वालों को पेड मीडिया की श्रेणी में रखा जा रहा है।

ट्विटर पर केजरीवाल को सलाह दी जा रही है कि अगर आप कार्रवाई नहीं कर सकते तो मनमोहन सिंह मत बनो और इस्तीफा दे दो। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जिस दिन ट्विटर पर हैशटैग आप, हैशटैग अरविंद केजरीवाल या हैशटैग योगेंद्र यादव ट्रेंड न कर रहे हों। प्रति मिनट 70 से 80 ट्वीट्स आ रहे हैं। ट्विटर पर एक हैंडल तो थूक कर चाटो-आप, के नाम से बना दिया गया है। दिन भर इस हैंडल से तमाम ऐसे ट्वीट आ रहे हैं तो आम आदमी पार्टी पर हमला कर रहे हैं।इस हैंडल के ट्वीट्स पर गौर करें तो इसका एकमात्र उद्देश्य ये ही नजर आता है कि कैसे ये साबित किया जाए कि आप सरकार वायदों को पूरा करने में किस तरह से विफल साबित हो रही है। द घंटा टाइम्स, नाम का एक हैंडल तो प्रशांत भूषण की तुलना दिग्विजय सिंह से कर रहा है। यहां आप और कांग्रेस को  एक साथ निशाना बना दिया जा रहा है। योगेंद्र यादव को तो सोशल मीडिया पर आलोकनाथ आफ पॉलिटिक्स कहा जा रहा है।
 


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