लोकसभा में पेश किया गया जाएगा नि:शक्तता विधेयक: सोनिया

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Wednesday, January 15, 2014-8:18 PM

नई दिल्ली : संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज कहा कि फरवरी में संसद के आगामी सत्र में पारित कराने के लिए एक ऐसा विधेयक लाया जाएगा जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में नि:शक्त जन को पांच फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित ‘समर्थ-2014’ नाम के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सोनिया ने कहा कि नि:शक्त व्यक्तियों के अधिकारों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए नि:शक्तता कानून, 1995 में संशोधन किया जा रहा है।

 केंद्रीय कैबिनेट ने संशोधनों को मंजूरी दे दी है। मुझे पूरा यकीन है कि हम इसे अगले सत्र में पारित कराने में कामयाब रहेंगे। पिछले साल दिसंबर में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नि:शक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक को मंजूरी दी थी। इस विधेयक के दायरे में नि:शक्त व्यक्तियों से जुड़े कई मुद्दों, जैसे- भौतिक, मानसिक एवं विभिन्न तरह की नि:शक्तता को शामिल किया गया है।

सोनिया ने कहा कि नि:शक्त व्यक्तियों के मुद्दों को समाज एवं सरकार की मुख्यधारा से जोडऩे की जरूरत है और उनके विकास को नीतियों का एक अहम पहलू बनाना है। सोनिया ने कहा कि यदि सरकार एवं समाज ने नि:शक्त व्यक्तियों को अवसर मुहैया कराने में जरा सी भी प्रगति की है तो इसका श्रेय नि:शक्त व्यक्तियों की एकजुटता को दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नि:शक्त लोगों में आत्मविश्वास लाने की जरूरत है। उनके मानवाधिकार एवं स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए हमें अब भी काफी प्रयास करने की जरूरत है। नि:शक्त व्यक्तियों को समाज से अलग-थलग नहीं करना चाहिए। हमें सुनिश्चित करना होगा कि वे समाज की मुख्यधारा के भीतर अपनी जगह बनाएं और इसके अभिन्न अंग बनें।
 
अपने संबोधन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कुमारी सेलजा ने नि:शक्त लोगों से जुड़े मुद्दों पर जागरुकता पैदा करने में मीडिया की भूमिका पर जोर दिया। इस बीच, कार्यक्रम के दौरान एक कविता सुनाने वाले एक नेत्रहीन व्यक्ति ने यह कहते हुए सोनिया का ध्यान आकृष्ट किया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री भुपिंदर सिंह हुड्डा ने उसे एक स्थायी नौकरी देने का वादा किया था पर उस दिशा में अब तक कुछ नहीं किया गया है। इस मामले में उस व्यक्ति ने सोनिया के दखल की मांग की।
 


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