विदेशियों को बच्चे गोद देने के संबंध में बने दिशा-निर्देश

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Friday, January 17, 2014-4:06 PM

नई दिल्ली : अगर कोई विदेशी किसी माता-पिता से उसके बच्चे को गोद लेना चाहता है तो इस संबंध में अभी भारत में कोई दिशा-निर्देश नहीं है। ऐसे ही एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस तरह के मामलों के लिए दिशा-निर्देश तय किए जाने चाहिए। 

न्यायमूर्ति बी.डी. अहमद व न्यायमूर्ति  सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने किसी अनाथ या माता-पिता द्वारा छोड़ दिए गए बच्चे को किसी विदेशी को गोद देने के संबंध में दिशा-निर्देश बना रखे हैं,परंतु जिन मामलों में सीधे तौर पर कोई माता-पिता अपने बच्चे को किसी विदेशी को गोद देना चाहता है,तो इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं।

अदालत में दो याचिकाएं लंबित हैं। एक याचिका में एक यूएस में रहने वाली महिला डाक्टर ने बताया है कि वह उत्तर प्रदेश में रहने वाले एक दंपत्ति का बच्चा गोद लिया था। उसने डीड रजिस्ट्र्ड करवा ली परंतु उसे बच्चे का वीजा देने से इंकार कर दिया गया। उसे कहा गया कि पहले नो ओब्जेक्शन सर्टिफिकेट लाए।

जब उसने इन मामलों की देखभाल के लिए  बनाई गई कारा (सैंट्रल अडोप्शन रिसार्स अॅथारिटी) के समक्ष अपना पक्ष रखा तो उसकी मांग को खारिज कर दिया गया। दूसरी याचिका में एक अमरीकी दंपति ने एक बच्चा गोद लेना चाहा परंतु उनको इसकी अनुमति नहीं दी गई।


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