केजरीवाल धरना मामला: SC ने किया पुलिस आयुक्त से सवाल

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Friday, January 24, 2014-4:30 PM

नई दिल्ली: संविधानिक पद पर आसीन होने के बावजूद विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने के कारण अरविंद केजरीवाल की भूमिका आज उच्चतम न्यायालय के परीक्षण के दायरे में आ गई। न्यायालय ने राजधानी के मध्य में मुख्यमंत्री केजरीवाल के समर्थकों के गैरकानूनी जमावड़े को अनुमति देने के लिए कानून व्यवस्था बनाने वाली एजेन्सियों को भी आड़े हाथ लिया।

 
न्यायमूर्ति आर एम लोढा और न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह की खंडपीठ ने धारा 144 लागू होने के बावजूद लोगों को रेल भवन के बाहर एकत्र होने की छूट देने के लिए दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता की आलोचना की। धारा 144 लागू होने पर पांच या इससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी होती है।
 
न्यायाधीशों ने पुलिस आयुक्त बी एस बस्सी से सवाल किया, ‘‘दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू होने संबंधी निषेधाज्ञा के बावजूद वे (लोग) कैसे एकत्र हुए। आपने यह सब क्यों होने दिया जबकि पहले से ही वहां भीड़ थी।’’
 
न्यायाधीशों ने सवाल किया, ‘‘पुलिस ने इन सभी को वहां क्यों एकत्र होने दिया जबकि इससे निषेधाज्ञा का उल्लंघन होता था। हम जानना चाहते हैं कि क्या पुलिस ने कार्रवाई की थी। पांच व्यक्तियों के एकत्र होने की अनुमति देने के बाद पांच सौ और फिर हजारों की भीड़ हो गई थी।’’
 
न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि ‘हमारे पास मसला यह है कि सांविधानिक प्रावधानों का सम्मान हो।’ न्यायालय ने पुलिस आयुक्त को 31 जनवरी तक यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि केजरीवाल के धरना स्थल पर गैरकानूनी तरीके से लोगों को एकत्र होने की इजाजत क्यों दी गई।

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