कई सवाल भी छोड़ गया बिन्नी का संक्षिप्त अनशन

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Tuesday, January 28, 2014-2:29 PM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा): आम आदमी पार्टी से निष्कासित विधायक विनोद कुमार बिन्नी का महज 3 घंटों में अनशन कई सवाल भी पीछे छोड़ गया। बिन्नी ने घोषणा की थी कि मांगें माने जाने तक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ उनका अनशन जारी रहेगा। प्रचार भी खूब किया गया लेकिन अब सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि आखिर किस मजबूरी के कारण बिन्नी ने बिना किसी मांग के पूरा हुए अनशन खत्म कर दिया।

बेशक बिन्नी ने दावा किया है कि प्रमुख सामाजिक कार्यकत्र्ता अन्ना हजारे और उप राज्यपाल नजीब जंग के सुझाव पर उन्होंने अपना अनशन खत्म करने का निर्णय लिया लेकिन आम जनता उनकी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रही है। उनका कहना है कि सोमवार की सुबह बिन्नी के तेवरों को देख ऐसा लग रहा था कि हर हाल में वह अनशन पर लंबे समय तक बैठेंगे लेकिन जहां तक अन्ना हजारे की बात है, वह कुछ दिन पहले उनके गांव जाकर मिले थे। अनशन पर नहीं बैठने की नसीहत अन्ना हजारे ने उसी दौरान दी होगी।

साथ ही उप राज्यपाल ने भी उन्हें क्या कह दिया, जिनकी बात सुनने के बाद बिन्नी ने अचानक अपना इरादा बदल दिया। आखिर उन्होंने दिल्लीवालों से आप सरकार पर कथनी और करनी में काफी भिन्नता का आरोप लगाते हुए अनशन पर बैठने की मुनादी कर रखी थी। उसकी तैयारी भी की, लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें क्या हो गया?

सियासी हल्कों में यह भी चर्चा है कि क्या बिन्नी ने यह सब केवल लोकप्रियता पाने के लिए किया या उनपर अनशन पर बैठने के बाद कोई दबाव आ गया। खैर इसकी वजह कुछ भी रही हो, लेकिन एक बात यह हो सकती है कि बिन्नी नहीं चाहते कि आप के जो विधायक उनके साथ जुड़े हुए हैं, उनके बारे में आप के नेताओं को पता चल सके। हो सकता है कि वह चाहते हों, कि सही वक्त आने पर ही आप में विस्फोट किया जाए।

यदि उन विधायकों के बारे में अभी सबको पता चल गया, तो उनपर आप नेता दबाव की राजनीति अपना सकते हैं। इससे भी ज्यादा बड़ी बात यह है कि आने वाले दिनों में आप अपने विधायकों को संभाल कर रख पाएगी? क्या पार्टी को डर है कि भविष्य में वे भी विरोध के स्वर उठा सकते हैं। शायद यह भी एक वजह मानी जा रही है क्योंकि केजरीवाल के कई करीबी बिन्नी का साथ या उनके सम्पर्क में रहने वाले विधायकों की पहचान करने में जुटे हैं।

आप के उन विधायकों के बारे में पता चल पाएगा या नहीं, यह बात दीगर है। लेकिन पिछले दिनों भाजपा के एक विधायक ने कहा था कि आप के 10-12 विधायक उनके सम्पर्क में हैं, जो आप नेताओं की कार्यशैली से खिन्न हैं। देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में आप की सियासी बिसात पर ऊंट किस जन लोकपाल विधेयक को मंगलवार को दिल्ली मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल सकती है।

उसके मसौदे को मुख्य सचिव की अगुवाई वाली समिति ने करीब-करीब अंतिम रूप दे दिया है। एक अधिकारी के अनुसार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को एक बैठक में इस विधेयक पर लम्बी चर्चा की जिसमें प्रशांत भूषण, वकील राहुल मेहरा मंत्रिमंडलीय सहयोगियों एवं वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

सूत्रों ने बताया कि सरकार रामलीला मैदान में विधानसभा के विशेष सत्र में इस भ्रष्टाचार निरोधक विधेयक को फरवरी के पहले सप्ताह में पारित कराने की अपनी समय सीमा पर खरा उतरने के लिए सभी कदम उठा रही है। रामलीला मैदान में विधानसभा सत्र आयोजित करने पर कानून व्यवस्था का हवाला देकर दिल्ली पुलिस द्वारा ऐतराज जताने संबंधी एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने कहा कि सरकार एक बार में एक कदम उठा रही है और मसौदा तैयार हो जाने एवं मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल जाने के बाद वह इस मामले पर गौर करेगी।


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