क्या होगा हश्र केजरीवाल के 14 मुद्दों का

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Wednesday, January 29, 2014-12:24 AM
नई दिल्ली(अशोक शर्मा): आम आदमी पार्टी की सरकार ने मंगलवार को अपना एक माह का कार्यकाल पूरा कर लिया। सरकार गठित होने के बाद से जनता को उम्मीद थी कि सरकार अपनी सभी घोषणाओं को कुछ ही दिनों में पूरा कर देगी। 4-5 बातों पर तो अमल किया है लेकिन 2 दर्जन से अधिक आप के मुद्दे अभी तक अधर में लटके हैं।
 
जनता चाहती है कि सरकार अपने वायदों को जल्द से जल्द पूरा करे। आप सरकार अल्पमत में है और उसे कांग्रेस यानी हाथ का साथ कब तक मिलेगा, इससे वह भी अनजान नहीं है लेकिन क्या दिल्ली सरकार समय कम रहते हुए अपने वायदों पर खरा उतर पाएगी? आम जनता इस बात को तो स्वीकार कर रही है कि अरविंद केजरीवाल ने सिस्टम में बदलाव लाने की जो बात कही थी, अपने उस बात पर काफी हद तक सही साबित हुए हैं।
 
इनमें वी.आई.पी. कल्चर में बदलाव काफी अहम रहा है। मुख्यमंत्री या उनके मंत्रिमंडल के किसी भी सदस्य ने लाल बत्ती नहीं ली, खुद को सुरक्षा के तामझाम से अलग रखा और सरकारी आलिशान बंगलों में जाकर रहने का मोह तक त्याग दिया। बिजली वितरक कंपनियों के खातों का कैग से ऑडिट और बिजली के तेज दौडऩे वाले मीटरों की जांच, प्रत्येक परिवार को 20 हजार लीटर फ्री पानी देने की दिशा में घोषणा कर दी है लेकिन आप सरकार के ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर केंद्र सरकार के सहयोग के बिना पूरा होना असंभव दिखता है।
 
अनधिकृत कालोनियों को नियमित करना: मुख्यमंत्री बनने के बाद अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि दिल्ली की सभी अनधिकृत कालोनियों को नियमित किया जाएगा लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री मनीष सिसोदिया भी कहते हैं कि इन कालोनियों में रहने वाले लोगों के ऊपर तलवार लटकी हुई है।
 
पुलिस लोगों से चौथ वसूलती है। चुनाव में केवल वोट पाने के लिए राजनीतिक दल उनका उपयोग करते हैं और बाद में भूल जाते हैं लेकिन क्या बिना केंद्र सरकार की मदद के इन कालोनियों को नियमित करना आप सरकार के लिए मुमकिन है? जी हां नहीं। 1639 अनधिकृत कालोनियों में रहने वाले 50 लाख से अधिक लोग इसी बात का इंतजार कर रहे हैं कि उन्होंने तो आप का साथ दे दिया, अब देखना यह है कि आप उनकी सुध लेकर अपने वायदे को कब तक पूरा कर पाती है। 
 
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा: आप के नेता भी अब यह समझ गए हैं कि हर समस्या का समाधान धरना-प्रदर्शन नहीं है। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का सीधा-सीधा मतलब केंद्र सरकार के कुछ अधिकारों पर कटौती करना है, क्या केंद्र सरकार दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के अधीन करना चाहेगी? 
 

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