‘CIA को था यकीन, 1964 में लौट आएंगे नेताजी’

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Saturday, February 08, 2014-2:41 PM

कोलकाता: अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने 1945 में विमान दुर्घटना में सुभाष चंद्र बोस की मौत पर संदेह जताया था और उसे सूचना थी कि नेताजी 1964 में निर्वासन से लौट आएंगे । यह खुलासा गोपनीय दस्तावेजों से हुआ है। सीआईए की तरफ से जारी दस्तावेजों में कहा गया है, ‘‘दस्तावेजों की खोज से संकेत मिलते हैं कि नेताजी की मौत के बारे में कोई सूचना नहीं है जो रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर प्रकाश डालते हों।’’ सीआईए की तरफ से फरवरी 1964 में जारी दस्तावेज के मुताबिक, ‘‘इस तरह के विचार थे कि बोस वर्तमान नेहरू सरकार को कमजोर करने के लिए बागी समूह का नेतृत्व कर रहे थे।’’ सीआईए के चार दस्तावेज शोधकर्ता अभिषेक बोस और अनुज धर के अलावा नेताजी के प्रपौत्र चन्द्र बोस को दिए गए थे जिन्होंने सूचना की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत विस्तृत जानकारी मांगी थी। जनवरी 1949 की रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसी ने इन अफवाहों पर गौर किया कि बोस ‘अब भी जिंदा’ हैं।

नवम्बर 1950 में भारतीय राजनीतिक परिदृश्य की विस्तृत व्याख्या में एक उच्चपदस्थ सूत्र ने सीआईए को सूचित किया कि नयी दिल्ली में कहा जा रहा है कि बोस ‘‘साइबेरिया में हैं जहां वह वापसी की बड़ी संभावना का इंतजार कर रहे हैं।’’ जारी दस्तावेजों में सबसे पुराना मई 1946 का है जिसमें नेताजी की मौत की पुष्टि के बारे में वाशिंगटन डीसी में विदेश मंत्री से जानकारी मांगी गई थी। मुंबई में तत्कालीन अमेरिकी महावाणिज्य दूत ने लिखा, ‘‘अगर वह देश में लौटते तो समस्याएं शुरू हो जाती।’’ ब्रिटिश शासन द्वारा नजरबंद किए जाने के दौरान नेताजी 1941 में भारत से निकल गए थे ताकि स्वतंत्रता संग्राम में अंतरराष्ट्रीय सहयोग हासिल कर सकें । जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज की स्थापना करने के बाद 1945 में वह लापता हो गए।

उन्हें अंतिम बार बैंकॉक हवाई अड्डे पर 17 अगस्त 1945 को देखा गया। बोस के लापता होने की जांच कर रहे मुखर्जी आयोग ने इस बात को खारिज कर दिया कि 18 अगस्त 1945 को ताईवान में विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने नेताजी के लापता होने के बारे में दस्तावेजों और रिकॉर्ड को देने से पहले इंकार करते हुए कहा कि इस खुलासे से भारत का विदेशों से संबंध खराब होगा। नेताजी की जिंदगी पर शोध करने वाले लोगों और परिवार के सदस्यों ने कहा कि भारत सरकार को अब दस्तावेजों को जारी कर देना चाहिए।
 


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