नये रेल बजट में नई ट्रेनों की हो सकती है घोषणा!

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Tuesday, February 11, 2014-2:55 PM

दिल्ली: यूपीए सरकार अंतरिम रेल बजट को बुधवार को पेश करने जा रही है और उसकी कोशिश है कि इसके माध्यम से वह मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करे। इसके लिए वह कई नई ट्रेनों के शुरू करने की घोषणा के साथ-साथ और कई सुविधायें रेल यात्रायों के लिये लेकर आ सकती है। टिकटों की दरें में बदलाव होगा की नही इसका फैसला बुधवार को बजट पेश होने पर स्थिति साफ होगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यूपीए सरकार के ज्यादातर मंत्रियों और सांसदों ने रेल मंत्री से गुजारिश की है कि उनके इलाके में नई ट्रेन दी जाए या वहां महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव घोषित किए जाएं।

चुनाव को देकखते हुये नेता रेल मंत्रालय पर काफी दवाब बना रहे हैं। भारत में नई रेलगाडिय़ों को शुरू करने के लिए वहां के नेताओं का बड़ा योगदान होता है। इस साल भी रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खडग़े पर काफी दवाब है और वह रास्ता ढूंढ रहे हैं ताकि अधिक से अधिक मंत्रियों-सांसदों को खुश कर सकें। खडग़े उम्र के लिहाज से सबसे वरिष्ठ हैं और इस समय वह एक संतुलन बनाने में लगे हुए हैं। रेल मंत्री की सबसे बड़ी समस्या यह है कि रेलों के परिचालन में खर्च बढ़ता जा रहा है और उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि रेल किराये में कमी की जा सके।

आंकड़े के अनुसार रेलवे की परिचालन लागत अप्रैल-दिसंबर अवधि में बजट से 5,000 करोड़ रुपये ज्यादा हो चुका है। यानी उसका घाटा बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा उसकी कमाई 3,000 करोड़ रुपए घट गई है। रेलवे माल ढुलाई में भी अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पा रही है। इसलिए रेल किराये घटाने का सवाल ही नहीं पैदा होता है। चुनाव को ध्यान में रखते हुये कई नई रेलगाडिय़ों की घोषणा करेंगे। इसके अलावा रेलवे की सूचना व्यवस्था को सुधारने के लिए कई बड़े कदम उठाएंगे। इसके तहत स्टेशनों पर आने-जाने वाली ट्रेनों के बारे में सटीक सूचना देने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा कई स्टेशनों पर ऑटोमेटिक टिकट वेंडिग मशीनें भी लगाई जाएंगी। स्टेशनों में यात्रियों को और सुविधाएं देने के लिए कई कदमों की घोषणा हो सकती है। इसके अलावा कई भीड़भाड़ वाले इलाकों में रेल पुल बनाने की भी वह घोषणा कर सकते हैं।

शहरों के अंधाधुंध विकास के कारण वहां रेल फाटकों पर भारी भीड़ होने लगी है जिससे कई शहरों में तो ट्रैफिक जाम की भी समस्या हो गई है. वहां के सांसद ऐसी कई मांगें रेल मंत्री के सामने रख चुके हैं। इनमें से कइयों को अनुमति मिल जाएगी। रेल मंत्रियों की गलत नीतियों का ही नतीजा है कि यहां की रेलवे का विकास काफी मंद गति से हो रहा है। रेलवे के विकास में काफी तेजी दिखाने की जरुरत है। आजादी के 63वर्षों में भी हमारे देश में सड़को पर रेल फाटक की पूर्ण व्यावस्था नही हो पायी है। इससे शर्म की बात और क्या हो सकती है।


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