मेहरबान दिखे CM हरीश रावत, लगाई घोषणाओं की झड़ी

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Wednesday, February 12, 2014-3:26 PM

रुड़की: रुड़की के लोगों में हरीश रावत के राज्य का मुख्यमंत्री बनने से जबरदस्त उत्साह है। वे पहले एेसे आन्दोलनकारी है जिन्होने प्रथक उत्तराखंड राज्य की लड़ाई लड़ी और आज वे मुख्यमंत्री के पद तक पहुंच गये है। नये मुख्यमन्त्री से रुड़की के लोगों को भारी उम्मीदे है तो वही हरीश रावत भी यहां से सांसद बनने के बाद से खुद को ज्यादा जुड़ा हुआ मानते है। इस बात को उन्होने मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां का दौरा करके साबित भी किया है। एेसा लगता है कि जैसे वे जनपद के लोगों को यह संदेश देना चाहते है कि वे भले ही उत्तराखंड की गद्दी पर विराजमान हो गये हो लेकिन वे न तो रुड़की को भूले है और न ही रुड़की के लोगों को।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कुर्सी संभालने के एक सप्ताह के अन्दर जहां राज्यभर में 18०3 करोड की विकास योजनाआें का शिलान्यास कराया वही आपदाग्रस्त क्षेत्रों में जाकर आपदा पीड़ितो के आसूं पोछने के साथ ही उनके पुनर्वास व आपदा प्रभावित क्षेत्र के विकास को युद्घ स्तर पर शुरू कराया। यही नहीं अपने ससंदीय क्षेत्र हरिद्वार में उन्होने एक ही दिन में 263 करोड़ की विकास योजनाआें से जुडे़ कार्यो का लोकार्पण कर विकास की नई इबारत लिख दी। मुख्यमंत्री बनने के बाद रुड़की में अपने समर्थको से उन्होने पहले जैसे ही नजदीकिया कायम की और उन्हे सम्मान देने के साथ ही खुशहाल बनाने का वायदा भी किया। हरिद्वार जिले को विकास की दिशा में प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2०० करोड़ रूपये की लागत से ईएसआई अस्पतास खोलने,डेयरी विकास के लिए 417 करोड़ रूपये खर्च करने,चार डायग्रोस्टिक सेन्टर व 22 डिस्पेन्सरी खोलने,जमीन उपलब्ध  होने पर 9०० करोड़ रूपये की लागत से मेडिकल कालेज खोलने,1० करोड़ रूपये की लागत से गन्ना बीज कोष स्थापित करने,शुद्घ पेयजल नगरो व शहरो में उपलब्ध कराने के लिए विशेष योजनाआें को फलीभूत करने के आश्वासन के साथ ही मुख्यमन्त्री रुड़की की जनता की नजरो के प्यारे हो गए है।

हरीश रावत ने एक खुशहाल राज्य की परिकल्पना को साकार करने के लिए उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों को भी पूरा सम्मान देने का फैसला लिया है। जबकि अभी तक  राज्य के निर्माण के लिए संघर्षरत रहे आन्दोलनकारी स्वंय को उपेक्षित महसूस कर रहे थे और गैर आन्दोनकारी या फिर यूं कहे राज्य आन्दोलन से वास्ता न रखने वालो के सत्ता में बने रहने के कारण आन्दोलनकारियों के सपनों का उत्तराखण्ड नही बन पा रहा था। 13 साल पहले लम्बे संघर्षो के बाद उत्तराखण्ड राज्य बनने का सपना तो साकार हो गया था परन्तु जिन मुद्दों को लेकर प्रथक राज्य की लडाई लडी गई थी , वे मुद्दे ज्यों के त्यों बने रहे । उत्तराखण्ड राज्य की मांग को लेकर 1994 में जिन वीर वीरागंनाआे ने बलिदान दिया और संघर्ष पूर्ण आन्दोलन किया वे राज्य बनने के बाद से आज तक परेशान और हताश रहे है।

2 अक्टूबर 1994 की काली अन्धेरी रात को आज भी उत्तराखड के लोग भूल नही पाए है कि किस तरह उत्तराखण्ड राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे निहत्थे आन्दोलनकारियों के साथ क्रूरता की गई। चाहे बहादराबाद से लेकर मंगलौर,नारसन व रामपुर तिराहा तक का हिंसक कांड हो या उक्त कांड में निहत्थों पर बरसाई गई गोलियां और अबलाआें के साथ बलात्कार जैसी घिनौनी हरकते ,यह सब उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों ने झेला था जिसे कोई भी उत्तराखंडी कभी भूला नही पाएगा। राज्य के 14 अमर शहीदो के बलिदान से मिली प्रथक राज्य उत्तराखंड की सफलता के बाद भी जीवित आन्दोलनकारी अभी तक सम्मान को तरसते रहे है। वही शहीदो की चिताआे पर भी मेलों का आयोजन राज्य सरकार नही कर पा रही थी। राज्य बनने के 13 साल बाद भी वास्तविक आन्दोलनकारियों की पहचान यानि चिन्हीकरण का मामला राजनीतिक स्वार्थो की भेंट चढा रहा।

उत्तराखंड आन्दोलन में रुड़की के अन्दर पुलिस की गोली से गम्मीर रूप से घायल हुए प्रकाश कान्ति आज भी जिन्दा लाश के रूप में उपेक्षा का दुख झेल रहे है। गोली लगने से हमेशा के लिए शरीर में नाभि से नीचे का भाग मृतप्राय कर चुके प्रकाश कान्ति की इस आन्दोलन के कारण नौकरी तक छूट गई थी। जिस कारण रोटी रोजी के संकट से उभारने के लिए उनकी पत्नी आगे आई और स्कूल खोल कर स्वाभिमान के साथ जीने का जज्बा पैदा किया। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत रुड़की में जिला स्तरीय संसाधनों को देखते हुए जल्द ही रुड़की को जिला बानकर यहां के निवासियों को एक और सौगात दे सकते हैं। 


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