जनलोकपाल बिल पर तय होगा सरकार रहेगी या जाएगी

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Thursday, February 13, 2014-1:11 AM
नई दिल्ली(ताहिर सिद्दीकी): वीरवार से शुरू हो रहे दिल्ली  विधानसभा के सत्र में अगर विपक्ष और बाहर से समर्थन दे रही कांग्रेस ने बिल को सदन में पेश करने में अड़ंगा डाला तो सरकार इस मुद्दे पर ही वोटिंग करवाने की तैयारी में है। यानी आज ही तय हो जाएगा कि केजरीवाल सरकार और कितने दिन चलेगी।
 
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने आर-पार की लड़ाई की तैयारी कर ली है। विधानसभा का सत्र अपराह्न 2 बजे से शुरू हो रहा है, बजट सत्र से पहले इस सत्र को बुलाने का मकसद जनलोकपाल व स्वराज्य बिल को सदन में पारित करवाने की है। सत्र शुरू होते ही सरकार जनलोकपाल बिल को सदन में पेश करेगी लेकिन सरकार यह मानकर चल रही है कि विपक्षी भाजपा व बाहर से समर्थन दे रही कांग्रेस बिल को सदन में पेश नहीं होने देंगे।
 
ऐसे में सरकार की रणनीति लोकसभा चुनाव से पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ हाथ आने वाले इस मौके को भरपूर भुनाने की है। सरकार को भी लग रहा है कि अगर भ्रष्टाचार की जंग लड़ते हुए सरकार गिरी तो लोकसभा चुनावों के अलावा फिर से होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी को अच्छी सफलता मिल सकती है।
सत्र को लेकर सरकार की रणनीतिक तैयारी यह है कि जनलोकपाल का विरोध होने पर सरकार सत्र के शुरू में ही सदन में इसे पेश करने या नहीं करने को लेकर वोटिंग का सहारा लेगी।
 
सरकार की इस रणनीतिक तैयारी को लेकर पशोपश की स्थिति पैदा हो गई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि दोनों प्रमुख पार्टियां जनलोकपाल को लेकर अडिय़ल रवैया अख्तियार नहीं करेंगी और बिल आसानी से पारित हो जाएगा लेकिन दिल्ली  सरकार को लेकर केंद्र सरकार के बनाए गए नियम के मुताबिक बिल को सदन में पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी जरूरी होगी।
 
यहीं पर अरविंद केजरीवाल के जनलोकपाल विधेयक को लटकाए रखने की तैयारी चल रही है। वहीं,सरकार ने इस स्थिति पर भी विचार कर लिया है। अगर विधेयक सदन में पारित हो गया तो केंद्र सरकार पर राष्ट्रपति से विधेयक पर हस्ताक्षर कराने का दबाव 
बढ़ा देगी। 

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