राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई

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Thursday, February 20, 2014-8:22 PM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार को आज नोटिस जारी करते हुए यह आदेश दिया कि वह इस मामले में अगले आदेश तक यथास्थिति बरकरार रखेगी।

न्यायालय की ओर से यह अंतरिम रोक केन्द्र सरकार की उस अपील पर आयी है जिसमें उसने स्व. गांधी के सात हत्यारों की रिहाई के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी है।  केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में आज आनन-फानन में एक अपील दायर की है जिसकी सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह अंतरिमा आदेश जारी किया है। न्यायालय इस मामले पर छह मार्च को सुनवाई  करेगा।

न्यायालय ने कहा कि मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने का परिणाम स्वत: ही सजा में माफी नहीं हो सकता है और जेल से कैदियों की रिहाई से पहले कानून में प्रतिपादित उचित प्रक्रिया का पालन करना ही होगा।  इससे पहले आज सुबह केन्द्र सरकार ने इस मामले के दोषियों को रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के फैसले पर रोक के लिये न्यायालय में अर्जी दायर की।

न्यायालय इस पर सुनवाई के लिये तैयार हो गया।  केन्द्र सरकार की ओर से सालिसीटर जनरल मोहन परासरन ने राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि तीन दोषियों की मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने के शीर्ष अदालत के निर्णय पर पुनर्विचार की याचिका पर फैसला होने तक राज्य सरकार को इन कैदियों को रिहा करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।  शीर्ष अदालत ने दया याचिकाओं के निबटारे में 11 साल का विलंब होने के आधार पर राजीव गांधी हत्याकांड में दोषी संतन, मुरूगन (दोनों श्रीलंकाई तमिल हैं) और पेरारिवलन की मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया था।

न्यायालय के इस निर्णय के बाद राज्य सरकार ने कल ही इस मामले के सभी सात दोषियों को रिहा करने का फैसला कर लिया था।  संतन, मुरूगन और पेरारिवलन इस समय वेल्लोर जेल में बंद हैं। राज्य सरकार ने इनके साथ ही 21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा भुगत रहे चार अन्य दोषियों नलिनी, राबर्ट पायस, जयकुमार तथा रवीचंद्रन को भी राज्य सरकार ने रिहा करने का फैसला किया था। 

राज्य सरकार ने इनकी रिहाई के मामले में अपने लिए और केन्द्र सरकार के लिये तीन दिन की समय सीमा निर्धारित की थी।  टाडा अदालत ने जनवरी, 1998 में राजीव गांधा हत्याकांड के अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुये उन्हें मौत की सजा दी थी। शीर्ष अदालत ने 11 मई, 1999 को इसकी पुष्टि कर दी थी।

वहीं इससे पहले राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री के हत्यारों को छोडऩा ठीक नहीं, अगर ऐसा होता है तो आम आदमी न्याय की उम्मीद कैसे करेगा। वहीं, राजीव गांधी के हत्यारों को समय से पूर्व रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को कांग्रेस ने 'दुराग्रही और लोकप्रियता हासिल करने वाला' कदम बताया।


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