जानिए सहारा का क्या था प्रस्ताव जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया

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Friday, March 07, 2014-5:31 PM

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों के 20 हजार करोड़ रूपए लौटाने के संबंध में सहारा समूह का प्रस्ताव आज ठुकरा दिया। कोर्ट ने कहा कि उसे कोई ‘सम्मानजनक’ प्रस्ताव पेश करना होगा। सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय को अभी मंगलवार तक तिहाड़ जेल में ही रहना होगा क्योंकि कोर्ट इस मामले में अब 11 मार्च को ही आगे विचार करेगा। शीर्ष अदालत ने इस बात पर अप्रसन्नता व्यक्त की कि विशेष पीठ को उसके मामले पर विचार के लिये बैठना पड़ा लेकिन उसने कोई ठोस प्रस्ताव पेश नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि यह तो पीठ का ‘अपमान’ है। 

न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की पीठ के समक्ष सहारा समूह ने कहा कि वह तीन दिन के भीतर 2500 करोड़ रूपए का नकद भुगतान करने के लिये तैयार है। समूह ने आश्वासन दिया कि शेष 14,900 करोड़ रूपए का भुगतान पांच किस्तों में जुलाई, 2015 के अंत तक कर दिया जायेगा।  

सेबी ने भी इस प्रस्ताव का विरोध करते हुये कहा कि सहारा समूह को 17,400 करोड़ नहीं बल्कि 34 हजार करोड रूपए का भुगतान करना है। सेबी का कहना था कि समूह 17,400 करोड रूपए का भुगतान करने के लिये तैयार हो गया था।  इस पर न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘यह सही प्रस्ताव नहीं है और प्रस्ताव सम्मानजनक होना चाहिए।’’  न्यायमूर्ति खेहड़ ने कहा, ‘‘आपने हमे एकत्र (विशेष पीठ) किया और फिर आप कह रहे हैं कि आप धन देने की स्थिति में नहीं है। यह हमारा अपमान है। यह उचित नहीं है। आपको हमें एकत्र नहीं करना चाहिए था यदि आपके पास उचित प्रस्ताव नहीं था।

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