नरेन्द्र मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने से क्यों नहीं डरे केजरीवाल?

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Wednesday, March 19, 2014-2:23 AM

नई दिल्ली: भगवान शिव की नगरी वाराणसी में एक ऐसे राजनीतिक मुकाबले का मंच तैयार हो रहा है जिस पर देशभर की निगाहें रहेंगी। वाराणसी लोकसभा सीट पर भाजपा का अच्छा प्रभाव है और पार्टी के पी.एम. पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने काफी सोच-विचार कर इस सीट से चुनाव लडऩे का फैसला किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मोदी ने हिंदू तीर्थ स्थान वाराणसी से चुनाव लडऩे का फैसला इसलिए किया है क्योंकि हिंदू राष्ट्रवाद की जड़ें यहीं से हैं और मोदी अपने समर्थकों को इन्हीं राजनीतिक जड़ों का स्मरण करवाने का प्रयास कर रहे हैं।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि जहां मोदी का दावा इतना मजबूत है, वहां से आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने चुनाव लडऩे के लिए ताल क्यों ठोकी है? यद्यपि केजरीवाल ने इसकी घोषणा नहीं की है लेकिन संकेत जरूर दिए हैं कि वे वाराणसी से मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। केजरीवाल ने भी माना है कि वाराणसी से चुनाव लडऩा एक बड़ी चुनौती है, मगर वह इसे स्वीकार करने को तैयार हैं। जैसा कि विभिन्न ओपिनियन पोल में दर्शाया गया है कि भाजपा को लोगों का काफी अच्छा समर्थन मिलेगा।

मोदी के लिए देश भर में लहर चल रही है। इसकी तुलना में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) एक कमजोर दावेदार के रूप में दिखाई दे रही है। सीमित संसाधनों के साथ अपना पहला राष्ट्रीय चुनाव आप लड़ रही है। संगठन भी कमजोर है और उसके कार्यकत्र्ता अनुभवहीन हैं। पार्टी के पास वैसा राजनीतिक नेतृत्व नहीं जैसा भाजपा के पास है। अपने 49 दिनों के दिल्ली के कार्यकाल में केजरीवाल ने बहुत से लोगों को हताश भी किया है, फिर भी देश के कुछ हिस्सों में आप के वर्करों में काफी उत्साह है। इस सबके बावजूद मौजूदा राजनीतिक स्थिति केजरीवाल को विचलित नहीं कर पाई।

विश्लेषकों के अनुसार मोदी को चुनौती देकर केजरीवाल ने खुद की छवि एक मजबूत और संस्था विरोधी नेता के रूप में पेश की है। उन्हें देश के सबसे बड़े नेता को चुनौती देने में डर नहीं है। उन्होंने देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी चुनौती दे रखी है। यही नहीं, उन्होंने मीडिया पर भी जोरदार हमला बोला है। मोदी के खिलाफ लड़कर केजरीवाल न सिर्फ अपनी बोल्ड छवि को प्रदर्शित करना चाहते हैं बल्कि यह भी दिखाना चाहते हैं कि आम आदमी होकर भी दिग्गज नेता के खिलाफ लडऩे से नहीं डरते। केजरीवाल को भलीभांति पता है कि मोदी के खिलाफ चुनाव लडऩे के दौरान उन्होंने कहीं कुछ भी बोला तो वह बातें मीडिया की सुर्खियां बनेंगी। वैसे भी चुनाव के मौसम में हर नेता मीडिया कवरेज चाहता है और ऐसे में उनकी रणनीति भी यही लगती है कि ‘ऐनी पब्लिसिटी इज गुड पब्लिसिटी फॉर केजरीवाल’।

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