कभी मरने की हसरत, कभी जीने की ख्वाहिश

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Thursday, March 20, 2014-8:40 PM

नई दिल्ली  : यह कहानी एक ऐसे डॉक्टर की है, जिसने आत्महत्या करने के लिए कई दवाओं को मिलाकर अपने लिए जहर बनाने का अजीबो-गरीब तरीका चुना, लेकिन उसे लेने के बाद उसमें फिर से जीने की चाहत जाग उठी ।

दवाओं को मिलाने से बने इस खतरनाक जहर को युवा डॉक्टर के शरीर से बाहर निकालने का काम किया सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों ने । उन्होंने इलाज के लिए बिल्कुल नया और अनोखा तरीका अपनाया।रोजमर्रा के तनाव को झेलने में असफल 32 वर्षीय डॉक्टर ने मरने के लिए बेहद अनूठा तरीका चुना और ऐसी दवाएं लीं जिनसे दिल का दौरा पडऩा और मस्तिष्क का क्षतिग्रस्त होना तय था ।

 डॉक्टर ने सबसे पहले हृदय संबंधी बीमारी की दवा के 100 टैबलेट लिए । यह दवा दिल के मरीजों की धड़कन नियंत्रित करने के लिए दी जाती है लेकिन भारी मात्रा में लेने पर यह हृदयगति रोक सकती है जिससे दिल का दौरा पड़ सकता है ।

उसके बाद डॉक्टर ने सामान्य इनसूलिन के 1600 यूनिट लिए ताकि रक्त में शर्करा का स्तर खतरनाक रूप से नीचे गिर जाए । ऐसा होने पर व्यक्ति कोमा की स्थिति में पहुंच सकता है और मस्तिष्क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकता है ।

 इन दवाओं के बाद डॉक्टर ने भारी मात्रा में प्रोप्रानोलोल नामक दवा ली जो बेचैनी और रक्त में शर्करा के कम स्तर के लक्षणों को कम करता है । ऐसे में मरीज की बीमारी के लक्षणों को पहचानना काफी मुश्किल हो जाता है । इस कारण इलाज के दौरान यह बेहद खतरनाक हो सकता है । डिगाक्सिन के साथ लेने पर प्रोप्रानोलोल हृदयगति को भी कम कर देता है जो और ज्यादा खतरनाक है ।

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