इस प्रदेश में छिपा है उत्तर

  • इस प्रदेश में छिपा है उत्तर
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Friday, March 21, 2014-12:05 PM

नई दिल्ली: देश का नेतृत्व किसके हाथ में होगा इसका जवाब उत्तर प्रदेश से ही मिलेगा। प्रधानमंत्री पद के भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी का रथ उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दौड़ जीतने के लिए सबसे आगे है तो सत्तारूढ़ सपा और मायावती की बसपा भी दूसरे स्थान के लिए संघर्षरत हैं। कांग्रेस भी इस दौड़ में है लेकिन वह जीत के मकसद से नहीं।

उत्तर प्रदेश के चुनावी दंगल में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस-रालोद गठबंधन भाजपा को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानती हैं। इससे चुनावी सर्वेक्षणों की जरूरत नहीं कि वे किसको पहला स्थान देते हैं। सबसे बड़ा कारण कांग्रेस और भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार विरोधी लहर हो सकती है या फिर मोदी का विकास एजैंडा भी मुख्य मुद्दा बन सकता है मगर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि नमो का रथ उत्तर प्रदेश के लोगों के दिलों तक पहुंच चुका है।

भाजपा इस बार अपनी 1998 की स्थिति को दोहराना चाहेगी जब उसने 85 सीटों में से 55 जीती थीं (1999 में 5 सीटें उत्तराखंड में चली गईं)। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने कहा कि हमें विश्वास है कि इस बार भाजपा 50 सीटों पर विजयी होगी। सपा और बसपा दूसरे स्थानों के लिए संघर्षरत हैं। राज्य स्तरीय सरकार विरोधी लहर, मुजफ्फरनगर दंगों और खराब कानून व्यवस्था की स्थिति ने मुलायम सिंह यादव के संगठन के समर्थन आधार को न केवल खोखला किया बल्कि इसने बहुत गढ़ों में सपा के खिलाफ गैर-यादवों की पैठ को मजबूती प्रदान की है।

बसपा के पास इस वर्ष कोई लोकप्रिय एजैंडा नहीं, वह केवल सपा और भाजपा विरोधी नारों पर निर्भर है। उसके पक्ष में मुस्लिम वोट भी आ सकते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के प्रोफैसर आरशी खां ने कहा है कि मुसलमानों ने अभी कोई फैसला नहीं किया मगर मोदी के प्रति सतर्क हैं। सांप्रदायिक ताकतों (भाजपा) को पराजित करना इनका सबसे मजबूत हथियार है।

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