किताबों की दुनिया में भी छाए मोदी-केजरीवाल

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Sunday, March 23, 2014-1:40 PM

लखनऊ: देश के सोलहवें लोकसभा चुनाव में किताबें भी अपना रंग दिखा रही हैं। ई-शॉपिंग पोर्टल से लेकर किताबों की दुकानों तक मोदी पर लिखी दो दर्जन से अधिक किताबें छाई हुई हैं। इसके बाद डिमांड में हैं अरविंद केजरीवाल पर लिखी छह किताबें, जिनमें से दो तो ऑनलाइन आउट ऑफ स्टॉक हो गई हैं। चुनावी मौसम में किताबों की आमद को ‘बुक वार’ नाम दिया गया है।  

बुक वार में राहुल थोड़ा पीछे चल रहे हैं। उन पर लिखी चार किताबें बाजार में उपलब्ध हैं। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के जीवन से लेकर उनकी राजनीतिक यात्रा, विचार, काम और भाषणों पर आधारित तीन किताबें पेपरबैक और हार्डकवर के साथ किंडल (ईबुक) में उपलब्ध हैं। खास बात यह कि तीनों किताबें काफी डिमांड में हैं।

ये किताबें हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, तमिल और मलयालम भाषा में हैं। अंग्रेजी और हिंदी में लिखी किताबों की मांग ज्यादा है। पत्रकार अरुण आनंद की ‘नमो वाणी  नरेंद्र मोदी के ओजस्वी विचार’, मैनेजमेंट प्रोफेशनल राजीव गुप्ता की ‘घर-घर मोदी’, पत्रकार किंशुक नाग की ‘नरेंद्र मोदी एक राजनीतिक कथा’, पी. कुमार की ‘नरेंद्र मोदी का नमो मंत्र’ और डी.पी. सिंह की ‘क्यों आखिर मोदी? तलाश एक राष्ट्र नायक की’ किताबें पसंद की जा रही हैं।

किताब ‘भविष्य की आशा नरेंद्र मोदी’, ‘प्रेरणामूर्ति नरेंद्र मोदी’ और संगीता शुक्ला लिखित ‘नरेंद्र मोदी’ भी बिक रही हैं। समय की मांग को देखते हुए लेखकों ने मोदी के जीवन के साथ ही उनके विचार और भाषणों को इन किताबों में समेटा है। राजीव गुप्ता ने मोदी के भाषणों का संग्रह व संपादन ‘घर-घर मोदी’ में किया है, ये पुस्तक विविध मुद्दों पर मोदी के विचार से अवगत कराती है। प्रसिद्ध ब्लागर सुरेश चिपलूनकर ने इसमें मोदी की जीवनी लिखी है। पत्रकार सुदेश वर्मा ने ‘नरेंद्र मोदी द गेम चेंजर’ में मोदी की अब तक की यात्रा का विश£ेषण किया है तो लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय की लिखी ‘नरेंद्र मोदी  द मैन द टाइम्स’ में मोदी के बढ़ते कदम की कहानी कही है।

लेखक नरेंद्र गर्ग ने एक कदम आगे बढ़कर किताब ‘सीएम टू पीएम नरेंद्र मोदी’ लिखी है, जिसे मोदी समर्थक पसंद कर रहे हैं और इस किताब के हवाले से लोगों को बता रहे हैं कि मोदी प्रधानमंत्री बने तो क्या बदलाव लाएंगे। मोदी की विचारधारा पर आधारित सिद्धार्थ मजुमदार की किताब ‘मोदीत्व-द आइडिया बिहाइंड मैन’ बुद्धिजीवियों की पसंद बनी हुई है। इस बीच प्रभात प्रकाशन ने मोदी पर ग्राफिक नॉवेल निकालने के साथ ही उन पर छह और किताबें प्रकाशित की हैं। एम.वी. कामत लिखित किताब ‘द मैन ऑफ द मोमेंट नरेंद्र मोदी’ और ‘द आर्किटेक्ट ऑफ ए माडर्न स्टेट’ भी पाठक ऑनलाइन खरीद रहे हैं।

डीपी सिंह की ‘नरेंद्र मोदी : यस ही कैन’ और एस.आर. शर्मा की ‘इंडिया नीड्स नरेंद्र मोदी’ भी पाठकों की परचेज लिस्ट में हैं। मांग को देखते हुए ऑनलाइन शॉपिंग साइट अमेजन 26 मार्च को रिलीज होने वाली किताब ‘नरेंद्र मोदी : सैफ्रन मॉडर्निटी एंड द रीमेकिंग ऑफ गुजरात’ की प्रीबुकिंग कर रही है। इसे विदेशी लेखक क्रिस्टोफी जेफरलो ने लिखी है। किताबों के बाजार में मोदी के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बारे में दिल्ली के बाहर लोग ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं। यही वजह है कि अरविंद पर लिखी छह किताबें डिमांड में हैं।

अमित सचदेवा की ‘राइज ऑफ अरविंद केजरीवाल’, अमन कुमार की ‘अरविंद केजरीवाल-ए मैन विथ मिशन’, ए.एम. द्विवेदी की ‘अद्भुत व्यक्तित्व अरविंद केजरीवाल’, प्रतिभा साहनी की ‘अरविंद केजरीवाल-भारत नए क्षितिज की ओर’, रश्मि बंसल की ‘अरविंद केजरीवाल-इन टू द हैवन ऑफ फ्रीडम’ और सौरभ आर्य व विनीत के. बंसल की ‘आम आदमी का नायक’ ऑनलाइन बिक रही हैं। ‘राइज..केजरीवाल’ और ‘ए मैन विथ मिशन’ अब आउट ऑफ स्टॉक हो गई हैं।

अरविंद केजरीवाल की स्वयं लिखी किताब ‘स्वराज’ भी फाइव स्टार रेटिंग के साथ खूब बिक रही है। बुक वार में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी काफी पीछे चल रहे हैं। उन पर मात्र चार किताबें आई हैं, जिसमें आरती रामचंद्रन की अंग्रेजी और हिंदी में ‘डिकोडिंग राहुल गांधी’ सबसे ज्यादा डिमांड में है।
इस किताब में राहुल के फैमिली बैकग्राउंड, उनकी जीवनी के साथ ही उनके राजनीतिक प्रयोगों की जानकारी देते हुए विश£ेषण किया गया है। ए.के. सिंह की ‘राहुल गांधी एस्पिरेशन ऑफ इंडिया’ और एन.लक्ष्मीप्रिया की ‘राहुल गांधी-द एक्सपेरीमेंट्स विथ इंडियन सोसायटी’ भी उपलब्ध है।

 

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