नॉर्थ वेस्ट : पेयजल है बड़ा मुद्दा

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Wednesday, March 26, 2014-12:33 PM

नई दिल्ली : नॉर्थ वेस्ट लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी ने वर्ष 2009 में इस सीट से विजयी रही कृष्णा तीरथ पर ही भरोसा जताते हुए अपना प्रत्याशी बनाया है। वही बी.जे.पी. ने सीट पर हाल ही में बी.जे.पी. में शामिल हुए इंडियन जस्टिस पार्टी के नेता उदित राज को अपना प्रत्याशी बनाया है।

इनके अलावा आप पार्टी ने पहले यहां समाजसेवी महेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था  लेकिन संगठन पर ही सपोर्ट न करने व विधायक राखी बिड़लान पर रुपए मांगने का आरोप लगाते हुए बीते दिनों महेंद्र ने पार्टी आलाकमान को टिकट वापस लौटा दिया। इसके बाद मंगोलपुरी विधानसभा से विधायक व आप सरकार में पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री रही राखी बिड़लान को सांसद का टिकट सौंपकर चुनाव जीतने की कवायद की गई है।


सुरक्षित सीट पर मुकाबला दिलचस्प
नॉर्थ वेस्ट लोकसभा सीट दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में एक मात्र सुरक्षित सीट है। इसके चलते सातों सीटों के बीच यह अपना अलग ही महत्व रखती है। लोगों की मानें तो वह कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा तीरथ से वह खफा है। लोग मानते है की उन्होंने उनकी उम्मीद अनुसार विकास काम नहीं किया।

क्षेत्र आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य व परिवहन तीनों मसलों पर  पिछड़ा हुआ है। उधर आप पार्टी के इस लोकसभा से पूर्व प्रत्याशी महेंद्र सिंह के लडऩे से पहले ही मैदान छोड़कर भाग खड़े होने व राखी बिड़लान पर ही आरोप लगाने के बाद पार्टी द्वारा सीट से उसे टिकट देने के बाद लोगों में गफलत का माहौल है। बी.जे.पी. के प्रत्याशी उदित राज की बात करें तो वह इस सीट के लिए बाहरी प्रत्याशी है जिससे बी.जे.पी. के कार्यकत्र्ताओं में ही उनके प्रति नाराजगी है।

दूसरा पक्ष यह भी है की कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी कृष्णा तीरथ के पास जहां महिला एवं बाल विकास मंत्रालय है। वह जीती हुई सांसद भी है। वहीं उनकी साफ छवि उनकी चुनाव में मददगार शामिल होगी। वहीं बी.जे.पी. के उदित को यहां 5 विधानसभाओं में काबिज होने व यहां पार्टी का कोई मजबूत चेहरा नहीं होने का लाभ मिलेगा। आप पार्टी की राखी की बात करें तो वह इलाके में काफी चॢचत है और ग्रामीण व इलाके के सुरक्षित वोट बैंक पर उनका काफी प्रभाव माना जाता है।

आधी विधानसभा सीटें बी.जे.पी. के पास
दिल्ली के देहात इलाके से अपनी पहचान रखने वाली बाहरी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र का 2008 में नाम बदलकर नॉर्थ-वेस्ट कर दिया गया था। नाम बदलने के बाद भी यहां की स्थिति में कोई ज्यादा बदलाव नहीं आया है। विकास के मामले में नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली हमेशा से ही पिछड़ी रही है।

इस लोकसभा सीट  पर वर्तमान में विधानसभा में 5 सीटों पर बी.जे.पी. 2-2 आप व कांग्रेस व 1 निर्दलीय प्रत्याशी विजय रहे थे। ऐसे में विधानसभा में इस लोकसभा सीट से बी.जे.पी. आगे है। वहीं इतिहास देखे तो यहां 1952 से 2014 के बीच होने वाले लोकसभा चुनावों में सबसे ज्यादा कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।

विकास रहेगा प्रमुख मुद्दा
इस लोकसभा पर विकास का मुद्दा वोटिंग पर काफी असर डालेगा। यहां शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थान की सबसे बड़ी समस्या शुरू से रही है। वहीं पेयजल की समस्या का मुद्दा काफी गंभीर। देहात के छात्र दूरदराज के इलाकों में पढऩे जाते हैं। अनाधिकृत कालोनियों में पानी की लाइन व सीवर लाइन नहीं डाली गई है। उधर दिल्ली टैक्नीकल यूनिवॢसटी यहां की पहचान है। दूसरे राज्यों से भी यहां छात्र इंजीनियरिंग करने आते हैं। विश्व की बड़ी कंपनियों में यूनिवॢसटी के छात्र काम कर रहे हैं।

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