विरोधियों के कंधों पर जीत की जिम्मेदारी

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Saturday, March 29, 2014-1:55 PM
नई दिल्ली  (राजन शर्मा): राजधानी मेंं वोटिंग के लिए 15 दिनों से भी कम समय बचा है। ऐसे में सभी राजनैतिक पार्टियों के समर्थकों और नेताओं के सामने अपने उम्मीदवारों को जिताने का दवाब बढ़ता जा रहा है। अब लोकसभा चुनावों की कमान संभाल रहे नेताओं के माथे पर पसीना साफ देखा जा रहा है। 
 
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट की बात करें तो यहां गत दिनों लोकसभा क्षेत्र के जिला स्तर के कांग्रेस कार्यकत्र्ताओं ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को बकायदा लिखित पत्र लिखकर इस सीट से कांग्रेस सांसद व केन्द्रीय मंत्री कृष्णा तीरथ को प्रत्याशी न बनाने की सिफारिश तक की थी, जिससे क्षेत्र में अब तक विरोधियों की आवाज शांत नहीं हो रही है।
 
ऐसे में कांग्रेस आलाकमान ने जो लोग कृष्णा तीरथ को उम्मीदवार बनाने का विरोध कर रहे थे, उनके हाथों में  प्रत्याशी को जिताने की जिम्मेदारी दे दी है।असमंजस की स्थिति  दूसरी तरफ नॉर्थ-वेस्ट लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी का विरोध करने वाले एक दर्जन से अधिक जिला कांग्रेस कमेटी के बड़े नेताओं ने, जिनमें विधायक व निगम पार्षद व अध्यक्ष भी शामिल थे को लेकर यहां बड़ा सवाल यह है की क्या कृष्णा अब उन लोगों पर विश्वास कर पाएंगी? क्या अब उन्हीं लोगों के सहारे चुनाव जीतने के बारे में सोचा जा 
सकता है? 
 
शिकायत पर नहीं टला फैसला
हाईकमान से शिकायत के बाद कृष्णा तीरथ को ही पार्टी ने अपना प्रत्याशी चुना है, ऐसे में हालत और पेचीदा हो गए हैं। ऐसे में अब विरोध करने वालों पर ही चुनाव जितने की जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा की यह लोग चुनाव प्रचार करते हैं या फिर चुनाव से किनारा कर अपना विरोध जताते हैं। 
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