गुजरात में विकास के दावों का सच

  • गुजरात में विकास के दावों का सच
You Are HereNational
Saturday, March 29, 2014-11:34 PM

नई दिल्ली: सवाल उठता है कि गुजरात के विकास की बात तो जोर-शोर से की जा रही है लेकिन उसके पीछे का सच क्या है? कहीं विकास के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर तो नहीं बताया जा रहा? गुजरात में विकास की परिभाषा क्या है? क्योंकि अगर हम दूसरे राज्यों की तुलना गुजरात से करते हैं तो बिहार इस कड़ी में पहले नंबर पर आने का हकदार है। यदि हाल ही में होने वाले लोकसभा चुनावों के परिदृश्य पर एक नजर डालें तो आॢथक, प्रशासनिक सुधार और विकास जैसे मुद्दों को अधिकांश राजनीतिक दलों ने अपने एजैंडे में शामिल किया हुआ है। अब वह चाहे कांग्रेस हो, भाजपा हो, बिहार की नीतीश सरकार हो या पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी हों। विकास के मुद्दे को चुनाव मैदान में उतारने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय दिया जा सकता है।

एक तरफ कांग्रेस के युवा उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी जनसभाओं में यू.पी.ए. के विकास का गुणगान करते हुए गुजरात के विकास पर चुटकी लेते हैं तो नीतीश कुमार बिहार में प्रशासनिक सुधार व विकास के आंकड़े पेश कर मोदी के विकास के नारे की हवा निकालते नजर आते हैं। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल तो गुजरात में जाकर ही पोल-पट्टी खोल आए! अब देशभर में घूम रहे केजरीवाल के पास यही राग है जिसे वह अलापने से नहीं चूकते। बहरहाल हकीकत यही है कि इस बार के चुनावों में अभी तक प्रमुख मुद्दे विकास और भ्रष्टाचार ही हैं।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राज्य के विकास की जो ब्रांडिंग शुरूआत में की उस पर बाकी राज्यों व विपक्षी दलों का ध्यान कम था लेकिन जब भाजपा इसे अपना मुख्य चुनावी एजैंडा बनाकर जनता के बीच उतरी तो बाकी दलों व राज्यों को उसने सोचने पर विवश कर दिया। संभवत: उन्हें इस बात का इल्म नहीं रहा होगा कि आगामी लोकसभा चुनाव भाजपा इसी मुद्दे पर लडऩे जा रही है।

बड़े गुपचुप तरीके से भाजपा ने इसकी रणनीति तैयार की थी जिसे वह विभिन्न प्रचार माध्यमों के जरिए जनता के बीच एक ‘मैसेज’ के रूप में पहुंचाने में सफल रही। उसकी इस रणनीति को बाकी दलों ने बहुत देर में समझा और उसके विरोध की रणनीति बनानी शुरू की। यही कारण है कि अभी भी जो लोग विरोध कर रहे हैं वे पूरी तैयारी के साथ खड़े नजर नहीं आते हैं।

2000 के दशक से आज तक यदि गुजरात और बिहार के विकास की तुलना की जाए तो बिहार को सबसे ज्यादा नंबर मिलते हैं। गुजरात की विकास दर बिहार की तुलना में कम रही है क्योंकि विकास के क्षेत्र में गुजरात पहले से ही सुदृढ़ स्थिति में रहा है।  हां, बिहार की दशा जरूर इन डेढ़ दशकों में काफी सुधरी है। आप लालू यादव के समय का बिहार याद करें और आज के नीतीश के कार्यकाल का बिहार देखें तो पाएंगे कि दोनों में आमूल-चूल परिवर्तन नजर आता है। बिहार की सड़कें, पुल, व्यापार, प्रशासनिक सुधार, परिवहन, लोगों के रहन-सहन में काफी फर्क नजर आता है।   

अपना सही जीवनसंगी चुनिए| केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन

Recommended For You