बस लक्ष्य पर नजर रखो मोदी !

  • बस लक्ष्य पर नजर रखो मोदी !
You Are HereNational
Monday, March 31, 2014-2:23 AM

पंजाब केसरी वीकली ओपिनियन पोल
नरेंद्र मोदी के आ जाने से भाजपा में नए उत्साह का संचार हुआ है। युवाओं की उम्मीद भी जाग उठी है। पार्टी नए रूप की ओर अग्रसर है। सवाल उठता है कि इस बदलाव से क्या कुछ बुजुर्ग नेता खुश हैं? संभवत: नहीं लेकिन आमजन की राय कहती है कि ऐसे लोगों को नजरअंदाज करते हुए मोदी को अपने मिशन के साथ आगे बढ़ते रहना  चाहिए...

अडवानी और जसवंत 60 के ऊपर चल रहे हैं, इसलिए उन्हें राजनीति छोड़कर अपने बच्चों को समय देना चाहिए। भाजपा को मजबूत करना चाहिए। छोटी-छोटी बातों का इश्यू नहीं बनाना चाहिए। पार्टी को युवा सोच और अनुभवी मार्गदर्शन की जरूरत है। (विश्वजीत कुमार, नई दिल्ली)

कोई नुक्सान नहीं होगा। ऐसे स्वार्थी और मौकापरस्त लोगों को बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। हर-हर मोदी, घर-घर मोदी जरूरी है। ये लोग 10 सालों से गुमनाम तरीके से रह रहे हैं और क्या करते रहे, पता नहीं। अब जब टिकट बंटवारे का वक्त आया तो लेनदार बनकर खड़े हो गए हैं। जरा, इन लोगों से इनकी कॉन्सीट्वैंसी का हिसाब तो लीजिए? (कैलाश तिवारी, टोरंटो)

मुझे नहीं लगता कि इनके जाने से भाजपा को कोई फर्क पड़ेगा क्योंकि जनता मोदी पर विश्वास करती है। अगर मोदी जी को भाजपा में पी.एम. पद का उम्मीदवार घोषित न किया गया होता, तो आज भाजपा अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही होती और ‘आप’ जैसी ढोंगी पार्टियां आगे निकल जातीं। (वनीश कुमार, कुरुक्षेत्र/हरियाणा)

नो, ऐसा कुछ नहीं होगा। इन्हें कुर्सी का कितना लालच है, इसका पता चलता है। अटल जी के बाद भाजपा की यह लहर मोदी की वजह से है। एक सुलझे हुए नेता हैं, सुब्रह्मण्यम स्वामी। उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया है, पर उनके चेहरे पर शिकन तक नहीं आई। ऐसे लोगों की भाजपा को जरूरत है। अडवानी जी का योगदान भी अतुलनीय है। सुषमा, जेतली, हुसैन और स्वामी जी के योगदान सराहनीय हैं। (सन्नी गिरी, मुम्बई)

हर व्यक्ति का एक वक्त होता है और ये नेता अपना गोल्डन समय बिता चुके हैं। अच्छी बात तब होती, जब ये बुजुर्ग नेता स्वैच्छा से अपनी सीटें युवाओं के लिए छोड़ देते। रही बात नुक्सान की, तो सब जानते हैं कि देश में इस समय मोदी के अलावा दूसरा नाम कोई नहीं ले रहा। (शत्रुघ्न सिंह, गोंडा)

मेरे हिसाब से तो इन दोनों नेताओं को अब पार्टी को और भी मजबूती प्रदान करने के लिए काम करना चाहिए। इन्हें अब तक जो भी पद मिले हैं, वेे भाजपा के कारण ही मिले हैं। अपने अनुभव युवाओं में बांटकर पार्टी से उन्हें जोडऩे का काम करें, इससे भाजपा को लाभ होगा। (दिनेश घोडके, सताना)

अडवानी जी का अपने नेताओं और भाजपा के साथ जो नाराजगी भरा व्यवहार रहा है, उसी की वजह से वह हाशिए पर चले गए हैं। उन्होंने बार-बार मोदी का विरोध किया, जो गलत था। जनता के असीम प्यार के आगे अडवानी का विरोध कोई महत्व नहीं रखता। (राजेश शरण, मंडी डबवाली, हरियाणा)

एक सवाल...अगर गरीब घर का कोई बेटा पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बनने लायक हो गया है, तो क्या उसे घर के बुजुर्गों का अपमान करने देना चाहिए? (महावीर सिंह शेखावत, जयपुर)

कोई नुक्सान नहीं होगा। एक बार पहले भी निकाला था पार्टी से। दोबारा नहीं रखना चाहिए था। जो दोगले हों वे लोग पार्टी छोड़कर चले जाएं। (दीवान उनियाल, अल्मोड़ा)

दोस्तो, अगर सीनियर नेता जसवंत सिंह को नजरअंदाज किया गया, तो भाजपा पूरी तरह बिखर जाएगी। उन पर कैसे भरोसा करें, जो अपने ही बुजुर्गों को घर से निकाल देते हैं?  (श्रवण जांगिड़, गुजरात)

विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You