वंशवाद की राजनीति: 50 सीटों पर राजनेताओं के पुत्र-पुत्रियां चुनावी मैदान में

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Tuesday, April 01, 2014-4:55 PM

नई दिल्ली: आगामी लोकसभा चुनाव में कम से कम 50 संसदीय सीट ऐसी हैं जिन पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी केे बेटे अभिजीत से लेकर राहुल और वरुण गांधी समेत विभिन्न दलों के राजनेताओं के ‘बेटे एवं बेटियां’ अपना भाग्य आजमाएंगे। इनमें से अधिकतर उम्मीदवार सत्तारूढ़ कांग्रेस के हैं। सांसद अभिजीत मुखर्जी अपनी मौजूदा जंगीपुर (पश्चिम बंगाल) निर्वाचन सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। राहुल गांधी उत्तर प्रदेश की अमेठी और वरुण गांधी पीलीभीत सीट से सांसद हैं। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे है और वरुण उत्तर प्रदेश की आंवला सीट से भाजपा की मौजूदा सांसद मेनका गांधी के पुत्र हैं।

 

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी रायबरेली से लोकसभा चुनाव में खड़ी हो रही हैं। भाजपा ने इस बार वरण को सुलतानपुर और मेनका को पीलीभीत से खड़ा किया है। मेनका दिवंगत नेता संजय गांधी की पत्नी हैं। वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ती तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से पहली बार लोकसभा चुनाव में उतर रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत झारखंड की हजारीबाग सीट से चुनाव लड़ रहे है। इसके अलावा उन केंद्रीय मंत्रियों के बेटे भी आगामी लोकसभा चुनाव में खड़े हैं जो अब जीवित नहीं हैं।

 

दिवंगत माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश की गुना सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। दिवंगत नेता राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट राजस्थान की अजमेर सीट से खड़े हैं। दिवंगत नेता जितेंद्र प्रसाद के पुत्र जितिन प्रसाद उत्तर प्रदेश की धौरहरा सीट से खड़े हैं।

 

इनके अलावा संप्रग सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री मुरली देवड़ा के पुत्र मिलिंद, केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित के पुत्र संदीप, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र, असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के पुत्र गौरव, छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र अभिषेक, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त, दिवंगत नेता प्रमोद महाजन की पुत्री पूनम, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजबीर सिंह और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे परवेश वर्मा भी चुनावी मैदान में हैं। केवल कांग्रेस और भाजपा जैसे मुख्य राजनीतिक दल ही अपने वरिष्ठ नेताओं के बेटे एवं बेटियों को टिकट नहीं दे रहे हैं बल्कि अन्य क्षेत्रीय दल भी ‘वंशवाद की राजनीति’ को आगे बढ़ा रहे हैं।

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