जंगली जानवरों ने उड़ाई किसानों की रातों की नींद

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Monday, April 07, 2014-3:45 PM

शिमला: हिमाचल प्रदेश में जंगली जानवरों से फसलों को सालाना करीब 1,000 करोड़ रुपए का नुक्सान होने की संभावना है। इसमें 500 करोड़ रुपए के करीब नुक्सान जानवरों की तरफ से फसलों को सीधे नुक्सान पहुंचाने से हो रहा है। साथ ही 500 करोड़ रुपए का नुक्सान फसलों को छोडऩे के कारण हो रहा है। फसलों को होने वाले नुक्सान का मुद्दा एक बार फिर चुनाव में उठा है। सभी राजनीतिक दल इस समस्या का समाधान खोजने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन अब तक इससे निजात नहीं मिल पाई है।

प्रदेश में कृषि और बागवानी को बंदर सबसे अधिक नुक्सान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा लंगूर, जंगली सुअर, नीलगाय, भालू, खरगोश, सैहल और मोर सहित अन्य पशु-पक्षी नुक्सान पहुंचा रहे हैं। सरकार ने बंदरों की तरफ से फसल को हो रहे नुक्सान को कम करने के लिए उनकी नसबंदी का काम तो शुरू किया है, लेकिन इस प्रक्रिया के बहुत धीमा होने से फिलहाल फौरी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। इसे देखते हुए चुनावी समय में राजनीतिक दल समस्या का स्थाई समाधान खोजने की बजाए इसके लिए एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं।

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