डोकलाम विवाद पर भारत की इस प्रतिक्रिया से चीन हैरान !

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Saturday, July 15, 2017-1:09 PM

ब्रसेल्सः सिक्किम सीमा पर डोकलाम क्षेत्र में भारत की इतनी कड़ी प्रतिक्रिया का अंदाजा चीन को नहीं था। यूरोपीय संसद के वाइस प्रेजिडेंट अरेसार्द चारनियेत्सकी ने अपने एक लेख में यह टिप्पणी की है। चारनियेत्सकी ने 'ईपी टुडे' में लिखे एक लेख में कहा है कि चीन को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि भारत भूटान सीमा की रक्षा के लिए इतने कड़क अंदाज में पेश आएगा। 
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बता दें कि 16 जून को चीन की सेना ने डोकलाम क्षेत्र के डोकला से जोम्पेलरी स्थित भूटान आर्मी के कैंप की ओर सड़क बनाने की शुरुआत की, जबकि भूटान और चीन के बीच सीमा पर बातचीत जारी है। इसके बाद भारत ने इसमें हस्तक्षेप किया। डोकलाम में भारतीय सेना और चीनी सेना में तनातनी के बाद दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण माहौल है और  भारत की इतनी कड़ी प्रतिक्रिया से चीन हैरान परेशान है। 

यूरोपीय संसद के वाइस प्रेजिडेंट ने अपने लेख में चीन के उस झूठ का भी पर्दाफाश किया जिसमें पेइचिंग ने कहा था कि उसके 'शांतिपूर्ण उदय' के कारण किसी देश को तकलीफ नहीं होगी। उन्होंने कहा कि चीन उस विदेश नीति को अपना रहा है जो अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत मान्य नहीं है। चीन इन दिनों सीमा विवाद के लिए भारत को जिम्मेदार बताकर रोजाना बयानबाजी कर रहा है।

भूटान ने कहा कि हमारा 1988 और 1998 का लिखित समझौता भी है, जिसमें कहा गया है कि सीमा मुद्दे के अंतिम समाधान होने तक दोनों पक्ष अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हैं। मार्च 1959 के पहले की तरह सीमा पर यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। समझौतों में यह भी कहा गया है कि दोनों पक्ष किसी तरह की एकतरफा कार्रवाई से बचेंगे, बल प्रयोग नहीं करेंगे और सीमा की स्थिति बदलने की कोशिश भी नहीं करेंगे।


 


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