भारत और जापान के बीच हुए असैन्य परमाणु करार पर हस्ताक्षर

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Friday, November 11, 2016-8:56 PM

टोक्यो: जापान ने भारत के साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोग में सहयोग के करार पर हस्ताक्षर कर दिए जिसके बाद भारत में जापान से परमाणु बिजली के उत्पादन के लिए आवश्यक ईंधन, उपकरण एवं प्रौद्योगिकी हासिल करने का रास्ता खुल गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच हुई शिखर बैठक के बाद उनकी मौजूदगी में दोनों देशों के बीच इस ऐतिहासिक करारनामे पर यहां हस्ताक्षर किए गए।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष समेत विभिन्न क्षेत्रों में नौ अन्य समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। भारत परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के दायरे से बाहर ऐसा पहला देश है जिसके साथ जापान ने असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग के करार पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते से परमाणु विद्युत परियोजनाओं के माध्यम से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करके भारत को तेज विकास की राह पर ले जाने में मदद मिलेगी। परमाणु समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही थी। इस पर जापानी प्रधानमंत्री की पिछले वर्ष दिसंबर में भारत यात्रा के दौरान सहमति बनी थी लेकिन प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी की जानी थी। हाल ही में इन्हें अंतिम रूप दिया गया था। 

इस समझौते से 48 देशों के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के भारत के प्रयासों को बल मिलेगा। बैठक के बाद पीएम मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि असैन्य परमाणु समझौता स्वच्छ ऊर्जा में दोनों देशों की भागीदारी विकसित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस करार से भारत को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को लेकर सहयोग के समझौते पर आज हस्ताक्षर होना, हमारी स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस क्षेत्र में हमारा सहयोग जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में हमारी मदद करेगा। मैं यह भी मानता हूं कि जापान के लिए इस समझौते का विशेष महत्व है। प्रधानमंत्री ने समझौते के लिए जापान के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए कहा, मैं प्रधानमंत्री आबे, जापान सरकार और जापान की संसद का इस समझौते का समर्थन करने के लिये धन्यवाद देता हूं।

इस समझौते के अलावा दोनों देशों के बीच विनिर्माण कौशल हस्तांतरण प्रोत्साहन कार्यक्रम को लेकर भी एक अहम करार किया गया जिसके तहत दस साल में 30 हजार भारतीय युवाओं को जापानी शैली विनिर्माण करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही इसरो और जापानी अंतरिक्ष एजेंसी जाशा के बीच उपग्रहों की खोज, संयुक्त मिशन चलाने, समुद्री और पृथ्वी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि, मछलीपालन, कपड़ा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा परिवहन एवं शहरी विकास के निवेश एवं ढांचागत विकास के समझौतों पर भी दस्तखत किए गए। गुजरात सरकार और जापान के बीच शिक्षा, व्यवसाय एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर भी एक करार पर दस्तखत किए गए। 


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