कांग्रेस: आसान नहीं डगर...

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Thursday, March 06, 2014-1:25 AM
नई दिल्ली (ताहिर सिद्दीकी): अगर तीन महीने पहले हुए दिल्ली  विधानसभा चुनावों को आधार माना जाए तो दिल्ली  में 10 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस अब तक की सबसे कमजोर स्थिति में है। अपना किला बचाने में जुटी कांग्रेस को भाजपा के अलावा नई नवेली आम आदमी पार्टी (आप) उसे पटकनी देने को बेताब है। 
 
आमतौर पर राजनीतिक विश्लेषक इस थ्योरी पर विश्वास करते हैं कि अगर दो चुनावों के बीच में 6 महीने या इससे कम अवधि होती है तथा कोई असामान्य घटना भी नहीं घटती तो फिर वोटिंग का ट्रेंड एक जैसा ही होता है। पिछले साल 4 दिसम्बर को हुए दिल्ली  विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन करते हुए 70 में से केवल 8 सीटें ही जीत पाई। वहीं, भाजपा की झोली में 32 व आप के पाले में 28 सीटें आईं।
 
अगर विधानसभा के नतीजों से मिले वोटों को लोकसभा की सात सीटों में बांट दिया जाए तो राजधानी में कांग्रेस अपनी सबसे बड़ी हार की ओर अग्रसर है। पश्चिमी दिल्ली  से  महाबल मिश्रा पार्टी के सांसद हैं। 
 
पिछले विधानसभा चुनावों में इस संसदीय क्षेत्र की 10 विधानसभा सीटों में से एक भी सीट पर कांग्रेस नहीं जीत पाई थी। ऐसा ही आलम दक्षिणी दिल्ली  संसदीय सीट का था। यहां से रमेश कुमार सांसद हैं। यहां की 10 सीटों में से कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली  लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री कृष्णा तीरथ सांसद हैं। यहां से कांग्रेस 2 सीटों पर ही जीत पाई थी।
 
पूर्वी दिल्ली  से मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित सांसद हैं। यहां भी कांग्रेस को 10 में से केवल 2 सीटें ही मिली थीं।
वहीं, चांदनी चौक सीट से केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल सांसद हैं। इस सीट में भी कांग्रेस 10 में से केवल 2 सीटें ही जीती थी।

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