बाबुओं की दबंगगिरी व मनमानी पर लगाम लगानी होगी: गुल पनाग

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Saturday, March 15, 2014-4:14 PM

चंडीगढ़: दिल्ली और चंडीगढ़ पुलिस में जमीन-आसमान का फर्क है। यहां की पुलिस दिल्ली पुलिस से ज्यादा स्मार्ट है। वह अपना काम कर रही है। हां, उसमें कुछ सुधार की जरूरत है। सिस्टम को सुधारा जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन में बैठे बाबुओं की दबंगगिरी व मनमानी पर लगाम लगानी होगी। उसके बाद ही सोचा जा सकता है कि जनता को राहत मिल पाएगी। कुछ इस तरह से अपने विचारों को सांझा किया गुल पनाग ने। शुक्रवार को गुल पनाग ने ‘पंजाब केसरी’ से की खास बातचीत।

राजनीति क्या है?
गुल: जहां पर 2 लोग साथ में खड़े हो जाते हैं और आपस में बात करना शुरू करते हैं वहीं से राजनीति शुरू हो जाती है या यह कहना सही होगा कि जहां लोग हैं वहां पॉलीटिक्स है।

क्या आप कभी स्टूडैंट पॉलीटिक्स का हिस्सा बनी हैं?
गुल: नहीं, मुझे कभी स्टूडैंट पॉलीटिक्स का हिस्सा बनने का मौका नहीं मिला। हां, मैं डिबेट में अक्सर हिस्सा लेती रही हूं। मैं इतना अच्छा डिबेट करती थी कि मुझे गोल्ड मैडल से सम्मानित किया गया था। राजनीति में आने के बाद

क्या आप फिल्मी करियर से दूरी बना लेंगी?
गुल: मैं हमेशा शहर के विकास और भ्रष्टाचार को खत्म करने व समाजसेवा करने के लिए चलाई गई मुहिम का हिस्सा बनती रही हूं। आज मुझे मौका मिला है तो मैं राजनीति को पहल दूंगी ताकि मैं समाजसेवा कर सकूं। बाकी बात रही फिल्मी करियर की तो उसके बारे में मैंने अभी तक कुछ सोचा नहीं है।

जनता आपको वोट क्यों दे?
गुल: आज जनता भ्रष्टाचार  और महंगाई से तंग आ चुकी है। अब उन्होंने मन बना लिया है कि इस बार स्वच्छ राजनीति मिले। मैं शहर की जनता से वायदा करती हूं कि आम आदमी पार्टी पर लोगों के विश्वास पर मैं खरी उतरूंगी।

फिल्मी राजनीति और रीयल राजनीति में क्या फर्क देखने को मिला?

गुल: लोग फिल्म देखने आते हैं। फिल्मी राजनीति की तारीफ भी करते हैं। यह सब कुछ दिनों के लिए होता है लेकिन जो रीयल राजनीति है इसमें हर फैसला जनता पर असर  डालता है। हमारी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। राजनीति का हर कार्य जनता कभी नहीं भुलाती।

राजनीति में आते ही सालगिरह भूली गुल
राजनीति में सबसे ज्यादा असर दिमाग पर होता है। जो एक बार राजनीति में पैर रख लेता है उसके पास न तो परिवार के लिए समय होता है और न ही अपने साथ जुड़े खास दिनों को याद रख पाता है। कुछ ऐसा ही गुल पनाग के साथ आजकल हो रहा है। वीरवार को गुल पनाग ने आम आदमी पार्टी (आप) का दामन थामा। वह राजनीति में कदम रखने पर इतनी उत्साहित थीं कि अपनी जिंदगी का सबसे अहम दिन यानी अपनी सालगिरह तक को भूल गई थीं। रात को जब किसी जानकार ने गुल को विश किया तो गुल को याद आया कि उनकी सालगिरह है। गुल के मुताबिक शादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि वह अपनी जिंदगी का सबसे अहम दिन भूली हों।

Edited by:Anu Sahu

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