जहां घुड़सवार देवी से ली जाती है होलिका दहन की अनुमति

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Sunday, March 16, 2014-6:46 PM

रायपुर: रंग-गुलालों के त्योहार होली से एक दिन पहले होलिका दहन की परंपरा विविध रूपों में निभाई जाती है। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले के एक गांव में एक अनूठी परंपरा आज भी कायम है। यहां घुड़सवार देवी का आवाहन कर उनकी पूजा के बाद ही होलिका दहन किया जाता है। पुजारी की अगुवाई में घोड़े पर सवार देवी का आवाहन कर उनसे अनुमति ली जाती है।

जगदलपुर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर चित्रकोट में बसे ग्राम टाहकापाल में एक खुले चबूतरे पर श्वेत घोड़े की आकृति बनी हुई है, जो बरबस सबका ध्यान खींचती है। चबूतरे पर बनी घोड़े की आकृति में मावली माता को अदृश्य विराजित माना गया है। इसलिए घोड़े पर माता की आकृति नहीं बनाई गई है।

ग्रामीण सभी अच्छे कार्यों के लिए समय-समय पर देवी का आवाहन करते हैं। इसी कड़ी में होलिका दहन से पहले घोड़े में सवार देवी का ढोल-नगाड़ों का साथ आवाहन किया जाता है। ग्राम पुजारी सहदेव की अगुवाई में अनुमति लेने की रस्म पूरी की जाती है। इसके बाद होलिका दहन की शुरुआत होती है।

ताहकापाल गांव के साधुराम कहना है कि इस चबूतरे के आसपास लकडिय़ों का ढेर इक_ा किया जाता है। पुजारी पहले देवी की आराधना करते हैं, उसके बाद होलिका दहन किया जाता है। ग्रामीण रात में नाट का प्रदर्शन भी करते हैं, जिसे देखने बड़ी संख्या में दूर-दराज से ग्रामीण भी पहुंचते हैं।


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