सत्ता विरोधी या मोदी लहर?

  • सत्ता विरोधी या मोदी लहर?
You Are HereNational
Wednesday, March 19, 2014-2:09 AM

नई दिल्ली: हर चुनाव में एक ही सवाल हर एक की जुबान पर होता है कि आखिर कौन जीतेगा। 2014 का लोकसभा चुनाव एक थ्रिलर मूवी की तरह है जहां पर सस्पैंस अभी भी बरकरार है कि कौन सी पार्टी सत्ता में आएगी। कई चैनलों के ओपीनियन पोल के मुताबिक एन.डी.ए. की सरकार बनने की संभावना है, इसके बावजूद चुनाव को लेकर लोगों की दिलचस्पी कम नहीं हुई है।

पहली बार ‘आप’ फैक्टर के साथ क्षेत्रीय पार्टियां भी चुनाव में ज्यादा असर डाल रही हैं। एक निजी टैलीविजन चैनल के सर्वे के मुताबिक 195-220 सीटें भाजपा की झोली में आएंगी और इस तरह 273 का बहुमत का आंकड़ा प्राप्त करने के लिए उसे सहयोगी पार्टियों की जरूरत पड़ेगी। ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि लोग कहते हैं कि मोदी की लहर है। गौरतलब है कि वर्ष 2009 में कांग्रेस की 206 सीटें थीं और मनमोहन सिंह बिना इलैक्शन लड़े पी.एम. बने थे, फिर इतनी सीटों में मोदी की लहर कैसे हुई?

1984 में जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी तब कांग्रेस पार्टी ने 416 सीटें जीत कर राजीव गांधी के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। तब वास्तव में कांग्रेस की लहर थी। वर्तमान चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन 100 या पिछले चुनावों की अपेक्षा आधे से भी कम सीटों पर रहने की संभावना है, जिसमें से 50-60 प्रतिशत सीटें भाजपा और बाकी आप और क्षेत्रीय पार्टियों को मिलने की संभावना है। ऐसे में अगर मोदी लहर होती तो भाजपा 100 प्रतिशत सीटें निकाल लेती।

दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी आप ने कांग्रेस के साथ भाजपा का वोट शेयर घटा था जिससे भाजपा को बहुमत नहीं मिला था। गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के अलावा दिल्ली (आप-भाजपा नैट टू नैट) और कर्नाटक में कुछ हद तक भाजपा की लहर है लेकिन इसे पूरे देश में मोदी की लहर नहीं कहा जा सकता, हां इसे सत्ता विरोधी लहर जरूर कहा जा सकता है क्योंकि सरकार के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। असली टैस्ट तो बिहार और उत्तर प्रदेश में है, जहां भाजपा गैर कांग्रेस और मुस्लिम वोट ले जाएगी या नहीं, यह मेन फैक्टर रहेगा। अब चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You