अबकी चुनाव 200 गुना हुआ महंगा

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Wednesday, March 19, 2014-10:33 PM

 नई दिल्ली(ताहिर सिद्दीकी): बेलगाम महंगाई का असर आगामी लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार डेढ़ गुना से ज्यादा सरकारी खर्च का अनुमान है। चुनाव आयोग ने पिछले चुनाव में करीब 1200 करोड़ रूपए खर्च किए थे और इस बार करीब तीन हजार करोड़ रूपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि एक पार्टी अपने चुनाव प्रचार में इससे ज्यादा रकम खर्च कर देती है।

1952 से 1989 तक हुए 9 लोकसभा चुनाव में कुल 260 करोड़ रूपए ही खर्च हुए थे। वर्ष 2009 में हुए खर्च की आबादी से तुलना करें तो प्रति व्यक्ति 17 रूपए का हिसाब आता है। 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में 10 करोड़ 45 लाख रूपए खर्च हुए थे, जो प्रति व्यक्ति 28 पैसा था। पहले चुनाव से लेकर अब तक देश की आबादी में तीन गुना से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं, चुनाव के खर्च में 200 गुना बढ़ोत्तरी हुई है। लेकिन रूपए की वैल्यू में भी उसी अनुपात में गिरावट आई है। सुरक्षा को लेकर खतरे काफी बढ़े हैं। बूथों की संख्या बढ़ी है और ईवीएम मशीनों में निवेश से खर्च बढऩा लाजिमी है।

पिछले पांच साल में खर्चे में डेढ़ गुना बढ़ोत्तरी पर राजनीतिक विश्लेषक ज्ञानप्रकाश कहते हैं कि 2009 में जो चीज 15 रूपए में मिलती थी, वह आज 35 रूपए में मिल रही है। ईवीएम मशीनें लगाने से पेपर का खर्च कम हुआ है, वह भी काउंट होना चाहिए। बूथों की तादाद भी बढ़ गई है। इसके अलावा सबसे ज्यादा खर्च सुरक्षा पर हो रहा है।
 


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