अमरिंदर, अम्बिका को मानना ही पड़ा राहुल का आदेश

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Saturday, March 22, 2014-9:52 AM

जालंधर: एक ओर जहां भाजपा सहित तमाम विपक्षी दल इन दिनों प्रचारित कर रहे हैं कि अपनी हार निश्चित देख कर कांग्रेस के तमाम बड़े नेता चुनाव लडऩे से या इंकार कर रहे हैं या बहानेबाजी कर रहे हैं, वहीं ऑल इंडिया कांग्रेस के उपाध्यक्ष तथा पार्टी के युवराज राहुल गांधी ने इस अवधारणा को दूर करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसका साफ प्रभाव आज पंजाब में देखने को मिला जब पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री अम्बिका सोनी को क्रमश: अमृतसर और श्री आनंदपुर साहिब सीटों से प्रत्याशी बना दिया गया।

कांग्रेस हाईकमान के सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी ने इन दोनों नेताओं को स्पष्ट शब्दों में कहा था कि या तो वे इन क्षेत्रों में चुनाव लड़े वर्ना अपना राजनीतिक करियर खत्म ही समझें। माना जा रहा है कि अमरिंदर और अम्बिका सोनी को पंजाब से उम्मीदवार बनवाने में प्रदेशाध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्य भूमिका अदा की है जिन्होंने अहमद पटेल और शकील अहमद को विश्वास में लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी तक यह बात पहुंचाई कि पंजाब में अकाली दल और भाजपा को मात देने के लिए बड़े नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा जाना हितकर होगा।

सूत्र बताते हैं कि बाजवा ने ही हाईकमान के कानों में यह बात डाली कि बादल परिवार के निकटवर्ती मजीठिया को अमृतसर हलके तक ही केंद्रित तभी रखा जा सकता है जब जेतली के मुकाबले कैप्टन अमरिंदर जैसी शख्सियत को मैदान में उतारा जाए। ऐसे में मजीठिया को अमृतसर सीट अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनानी ही होगी और वह तरनतारन और गुरदासपुर सीटों पर हस्तक्षेप नहीं कर सकेंगे तथा न ही अपनी बहन के चुनावी क्षेत्र भटिंडा जा सकेंगे। प्रताप बाजवा का मानना है कि मनप्रीत बादल को भटिंडा से उम्मीदवार बनाने के चलते बादल परिवार भी भटिंडा तक ही सीमित हो जाएगा।

पंजाब के राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चा है कि बड़े तथा प्रभावशाली उम्मीदवार उतारने से  पंजाब कांग्रेस को 7-8 सीटें आने की सम्भावना बन गई है। इससे जहां पंजाब में प्रताप बाजवा की स्थिति मजबूत होगी, वहीं बाजवा बड़े नेताओं को चुनाव मैदान में उतार कर अपना बदला भी चुकता कर रहे हैं, क्योंकि अमरिंदर और अम्बिका सोनी ने ही प्रताप बाजवा को इसी तरह गुरदासपुर से उम्मीदवार बनवाने में मुख्य भूमिका अदा की। बाजवा को चुनाव में फंसाकर कैप्टन अमरिंदर कैम्पेन कमेटी के अध्यक्ष बनना चाहते थे। आज हालात जैसे भी बने परंतु अमरिंदर तथा अम्बिका सोनी चुनाव मैदान में आ जाने से पंजाब में कांग्रेसी वर्करों और नेताओं के हौसले बुलंद हो गए हैं।

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