फेसबुक और ट्विटर बचाएंगे लोगों की जान!

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Wednesday, February 26, 2014-2:31 PM

नई दिल्ली: फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स खुदकुशी को रोकने में कारगर माध्यम बन सकती हैं। आज सोशल मीडिया को भावनाओं को भड़काने तथा आत्महत्या की घटनाओं को बढ़ावा देने के लिए दाषी माना जा रहा है लेकिन मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि फेसबुक एवं ट्विटर जैसी सोशल साइट्स से आत्महत्या करने की सोच रखने वाले लोगों की भावनाओं एवं विचारों को समय से पूर्व जाना जा सकता है और उन्हें आत्मघाती कदम उठाने से रोका जा सकता है।

दिल्ली साइकिएट्रिक सेंटर के निदेशक डॉ. सुनील मित्तल बताते हैं कि आत्महत्या करने वाले 80 से 90 प्रतिशत लोग खुदकुशी करने की अपनी योजना या सोच के बारे में पूर्व संकेत अवश्य देते हैं। ऐसे लोगों में काफी लोग सोशल साइटों और ब्लागों के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त करना ज्यादा आसान समझते हैं और ऐसे लोगों को समय से मदद मिल जाए तो उनकी जान बचाई जा सकती है।

डॉ. सुनील मित्तल बताते हैं कि हमारे देश में हर साल 10 लाख से अधिक लोग खुदकुशी के प्रयास करते हैं और उनमें से 10 प्रतिशत लोग आत्महत्या कर लेते हैं। इनमें से ज्यादातर लोग किसी न किसी रूप से अपनी भावनाएं अवश्य व्यक्त करते हैं, लेकिन अक्सर इनकी भावनाओं और पूर्व संकेतों की अनदेखी कर दी जाती है।

आत्महत्या को रोकने की पहल करने के लिये गठित स्वयंसेवी संस्था जन संजीवनी की संयोजक डॉली मलिक के अनुसार आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए समाज में एक ऐसा माहौल बनाना जरूरी है ताकि लोग आत्महत्या एवं इसके कारणों के बारे में खुल कर बात कर सकें। ऐसा माहौल बनने से ही आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाने के बारे में सोच रहे निराश लोगों के मन में आशा का संचार किया जा सकेगा और उन्हें समय पर मदद दी जा सकेगी।

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