मंगल के बाद भारत के निशाने पर सूर्य

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Wednesday, March 05, 2014-10:12 AM

नई दिल्ली: मंगलयान के सफल प्रक्षेपन के बाद इसरो अब सूर्य मिशन की तैयारी में है। सूर्य के अध्ययन के लिए वर्ष 2020 तक आदित्य-1 उपग्रह का प्रक्षेपण किया जाएगा, इस अभियान में 1.20 अरब रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस मिशन से सौर हवाओं के अध्ययन में मदद मिलेगी। अब तक सिर्फ अमरीका, यूरोपीय अंतरिक्ष एजैंसी और जापान ने ही सूर्य के अध्ययन के लिए स्पेसक्राफ्ट भेजे हैं। एक अरब 20 करोड़ की लागत वाला यह मिशन 2017 और 2020 के बीच में लॉन्च होगा। चंद्रयान-1 और मंगलयान की सफलता से उत्साहित इसरो के वैज्ञानिक ‘आदित्य मिशन’ की तैयारी में हैं।

क्या है आदित्य मिशन:-
- आदित्य एक उपग्रह है, जो सोलर ‘कोरोनाग्राफ’ यंत्र के जरिए सूर्य के सबसे भारी भाग का अध्ययन करेगा
- इससे कॉस्मिक किरणों, विकिरणों और एक  हजार किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से चलने वाली सौर हवाओं के अध्ययन में मदद मिलेगी।
- इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि सौर वलय और हवाएं किस तरह से धरती पर इलेक्ट्रिक प्रणाली और संचार व्यवस्था पर असर डालती है।
- इस मिशन से सूर्य के कोरोना से धरती के भू चुंबकीय क्षेत्र में होने वाले बदलावों के बारे में भी अध्ययन किया जा सकेगा।
- इससे मानव निर्मित उपग्रहों और अंतरिक्षयानों को बचाने के उपाय भी पता किए जा सकेंगे।

कैसे करेगा काम:-
- आदित्य-1 उपग्रह सूर्य कोरोना के अध्ययन के लिए कृत्रिम ग्रहण का उपयोग करेगा, जिसका तापमान 10 लाख डिग्री है।
- यह नासा के 1995 में प्रक्षेपित ‘सोहो’ के बाद सूर्य के अध्ययन का सबसे उन्नत उपग्रह होगा।

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