बुजुर्ग उम्र बढ़ जाने की वजह से नहीं करवाते अपना इलाज

Edited By ,Updated: 12 May, 2024 05:14 AM

elderly people do not get themselves treated due to increasing age

गैर सरकारी संगठन (एन.जी.ओ.) ‘एजवैल’ द्वारा 10,000 बुजुर्गों पर किए गए सर्वेक्षण पर आधारित एक नई अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि देश के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 48.6 प्रतिशत बुजुर्ग तथा गांवों में रहने वाले लगभग 62.4 प्रतिशत...

गैर सरकारी संगठन (एन.जी.ओ.) ‘एजवैल’ द्वारा 10,000 बुजुर्गों पर किए गए सर्वेक्षण पर आधारित एक नई अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि देश के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 48.6 प्रतिशत बुजुर्ग तथा गांवों में रहने वाले लगभग 62.4 प्रतिशत बुजुर्ग अपनी बढ़ती आयु, आदतों, आर्थिक तंगी आदि के कारण नियमित रूप से डाक्टरों के पास नहीं जाते। 

संगठन ने सर्वेक्षण के दौरान कुछ बुजुर्गों से प्राप्त जानकारी के उदाहरण भी सांझा किए। इनमें 10 वर्षों से गठिया से पीड़ित 78 वर्षीय आगरा निवासी एक बुजुर्ग ने कहा कि नियमित डाक्टरी जांच के लिए अस्पतालों में जाना उन्हें परेेशान करने वाला और कठिन लगता है। इसलिए वह आमतौर पर आवश्यक डाक्टरी इलाज का कार्यक्रम रद्द करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसी प्रकार सर्वेक्षण में शामिल एक अन्य 72 वर्षीय बुजुर्ग ने एक अलग ही प्रकार की समस्या बताते हुए कहा कि चूंकि वह रिटायरमैंट के बाद मिलने वाली पैंशन की रकम पर ही पूरी तरह निर्भर हैं, इसलिए उस रकम को अपनी सेहत संबंधी समस्याओं पर खर्च करना उन्हें बड़़ा कठिन प्रतीत होता है। 

उल्लेखनीय है कि कई बार बुजुर्ग साधन सम्पन्न होने के बावजूद अपनी सेहत के प्रति लापरवाही की आदत के कारण भी अपना इलाज नहीं करवाते, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता रहता है। उदाहरणस्वरूप, दांत टूट जाने पर भोजन ठीक से न पचने के कारण उन्हें पेट की तकलीफ का सामना करना पड़ता है। नजर कमजोर हो जाने पर चश्मा न लगवाने से गिरने, किसी से टकराने या सड़क पर चलते समय दुर्घटनाग्रस्त होने का डर रहता है और इसी प्रकार ठीक से सुनाई न देने पर भी समस्या पैदा होती है। इस स्थिति के दृष्टिगत बच्चों को चाहिए कि वे अपने बुजुर्गों में इस प्रकार की कोई समस्या देखने पर उन्हें उसका उपचार करवाने के लिए विवश करें और उन्हें अपने साथ ले जाकर उनका उपचार करवाएं। ऐसा करने से जहां वे अपने जीवन की संध्या सुखपूर्वक बिता सकेंगे, वहीं बच्चे भी उन्हें खुश देख कर आनंद महसूस करेंगे।—विजय कुमार 

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