डाटा सैंटर पर पर्यावरण कानून सख्ती से लागू हों

Edited By Updated: 12 Sep, 2026 03:29 AM

strict enforcement of environmental laws in data centers

इंटरनैट और सोशल मीडिया के डाटा को स्टोर करने के लिए फेसबुक, गूगल और अमेजन जैसी बड़ी टैक कम्पनियां यूरोप और अमरीका में ही डाटा सैंटर स्थापित करती थीं। लेकिन आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस (ए.आई.) के दौर में आधुनिक डाटा सैंटरों को बहुत बिजली और पानी चाहिए।...

इंटरनैट और सोशल मीडिया के डाटा को स्टोर करने के लिए फेसबुक, गूगल और अमेजन जैसी बड़ी टैक कम्पनियां यूरोप और अमरीका में ही डाटा सैंटर स्थापित करती थीं। लेकिन आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस (ए.आई.) के दौर में आधुनिक डाटा सैंटरों को बहुत बिजली और पानी चाहिए। ए.आई. डाटा सैंटर से गर्मी, शोर और प्रदूषण बढऩे की वजह से अमरीका में इनके निर्माण पर रोक लग रही है। सबसे बड़े बाजार और लोकतंत्र की वजह से भारत में डाटा सैंटर लगाने के लिए विदेशी टैक कम्पनियों में होड़ मची है। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डाटा सैंटर में 200 अरब डॉलर के निवेश से रोजगार बढऩे के साथ 2047 में विकसित भारत का सपना साकार होगा। डाटा सैंटर के निवेश से बहुत थोड़े ही स्थायी रोजगार बढ़ेंगे। लेकिन केंद्र और राज्यों में विदेशी डाटा सैंटर कंपनियों को छूट देने की होड़ मची है। आम बजट में केन्द्र सरकार ने डाटा सैंटर कम्पनियों को अगले 20 साल की टैक्स छूट दी है। डाटा सैंटर को रियायती जमीन, टैक्स में छूट के साथ राज्य सरकारों से सिंगल विंडो क्लीयरैंस मिल रहा है। 

समुद्री केबल से यूरोप, अमरीका और ऑस्ट्रेलिया से डाटा सैंटर जुड़ेंगे। इसलिए आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे तटीय राज्यों में डाटा सैंटर प्रोजैक्ट ज्यादा लग रहे हैं। विशाखापट्टनम में गूगल के एक गीगावाट डाटा सैंटर प्रोजैक्ट के लिए आन्ध्र प्रदेश सरकार 600 एकड़ जमीन के साथ 22000 करोड़ रुपए से ज्यादा का वित्तीय पैकेज दे रही है। आंध्र प्रदेश के कानून के अनुसार मंदिर की जमीन को 11 साल से ज्यादा की लीज पर नहीं दिया जा सकता लेकिन गूगल के डाटा सैंटर के लिए शहर को पीने के पानी की आपूॢत करने वाले तालाब के पास मंदिर की 160 एकड़ जमीन को 30 साल की लीज पर देने से लोगों में नाराजगी है। प्रोजैक्ट भूमि से 1 कि.मी. के दायरे के भीतर संरक्षित वन्य जीव अभ्यारण्य है। केन्द्र सरकार की 2017 की अधिसूचना के अनुसार ईको सैंसिटिव जोन में औद्योगिक गतिविधियों पर प्रतिबंध है।

ईको सैंसिटिव जोन के 5 कि.मी. दायरे में बड़े निर्माण के प्रोजैक्ट को कैटेगरी-ए के तहत केन्द्र सरकार से पर्यावरणीय अनुमति जरूरी है लेकिन आन्ध्र प्रदेश और दूसरे अन्य राज्यों में डाटा सैंटरों को कैटेगरी-बी-2 के तहत गलत तरीके से पर्यावरणीय अनुमति दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट और एन.जी.टी. के अनेक फैसलों के अनुसार अंडरग्राऊंड पानी के औद्योगिक इस्तेमाल के लिए भी विशेष अनुमति जरूरी है। केंद्र्र सरकार की 2006 की अधिसूचना के अनुसार सभी उद्योगों को ई.आई.ए. के तहत पर्यावरण क्लीयरैंस जरूरी है। इसके तहत लोगों की सेहत, पर्यावरण पर प्रभाव आदि का विस्तार से आकलन किया जाता है। उसके अनुसार जल और वायु प्रदूषण से जुड़े पहलुओं के साथ वेस्ट वाटर के इस्तेमाल का विवरण देना जरूरी है। 

किसी औद्योगिक बिल्डिंग के भीतर यूनियन कार्बाइड या कचरा बढ़ाने वाला खतरनाक उद्योग तो नहीं है, इसे सुनिश्चित करने के लिए औद्योगिक गतिविधियों का सही और पारदर्शी विवरण जरूरी है। अमरीकी अदालतों के फैसलों में डाटा सैंटर से पर्यावरण को हो रहे नुकसान का विस्तार से विवरण है। लेकिन विदेशी कम्पनियां भारत में ई.आई.ए. क्लीयरैंस की एप्लीकेशन में इन विवरणों का खुलासा नहीं कर रहीं। छद्म तरीके से बिल्डिंग प्रोजैक्ट के नाम पर राज्यों से डाटा सैंटरों को पर्यावरण कानून से छूट मिल रही है। छोटे उद्योगों के जैनरेटर चलाने पर अनेक प्रतिबंध हैं लेकिन डाटा सैंटरों में 24 घंटे बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए भारी क्षमता वाले डीजल जैनरेटर सैट्स के बैकअप लगाने पर कोई सवाल नहीं हो रहे। दिल्ली और एन.सी.आर. में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों के चलने पर रोक है। आम लोग घरेलू जरूरत के लिए अंडरग्राऊंड पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकते। कानपुर, आगरा जैसे अनेक औद्योगिक शहरों में प्रदूषण रोकने के नाम पर अनेक छोटे उद्योगों को बंद कर दिया गया है। लेकिन विशालकाय डाटा सैंटरों से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लोगों से छुपाया जा रहा है।

ए.आई. की अर्थव्यवस्था में अमरीका और चीन सबसे बड़े खिलाड़ी हैं। जबकि भारत विदेशी ए.आई. कंपनियों के लिए मुनाफा देने वाला सबसे बड़ा बाजार है। अब अमरीका की 5 स्टार ए.आई. अर्थव्यवस्था का कचरा पैदा करने वाले डाटा सैंटरों के लिए भारत में पर्यावरणीय कानूनों से छूट मिलना बेहद खतरनाक है। वंदे मातरम् में सुजलाम, सुफलाम शब्दों के भाव को सार्थक और फलीभूत करने के लिए भारत में जल, जंगल, जमीन, जानवर और जनता के पंच-ज का पोषण, संरक्षण और संवद्र्धन जरुरी है। 140 करोड़ जनता के जीवन के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखना राज्यों के साथ केन्द्र सरकार की भी जिम्मेदारी है।इसलिए किसी भी राज्य में डाटा सैंटरों को अनुमति देने के लिए केन्द्र सरकार को पर्यावरण से जुड़े सभी कानूनों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराना चाहिए।-विराग गुप्ता(एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट)

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