राकांपा के दोनों धड़ों में विलय हो जाएगा?

Edited By Updated: 07 Feb, 2026 05:24 AM

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राकांपा (एस.पी.) प्रमुख शरद पवार के बयानों से दोनों राकांपा गुटों के संभावित विलय में बाधाओं का संकेत मिलने के बाद, शरद पवार ने दिवंगत अजित पवार के बेटों के साथ एक बंद कमरे में बैठक की और बाद में उनके पति को श्रद्धांजलि देने के लिए बारामती में...

राकांपा (एस.पी.) प्रमुख शरद पवार के बयानों से दोनों राकांपा गुटों के संभावित विलय में बाधाओं का संकेत मिलने के बाद, शरद पवार ने दिवंगत अजित पवार के बेटों के साथ एक बंद कमरे में बैठक की और बाद में उनके पति को श्रद्धांजलि देने के लिए बारामती में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के घर गए। सूत्रों के अनुसार, चर्चा दोनों राकांपा गुटों के विलय की संभावना और आगामी जिला परिषद चुनावों पर केंद्रित हो सकती थी। अजित पवार की मृत्यु के बाद, शरद पवार और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं ने दावा किया कि विलय की बातचीत अंतिम चरण में थी और दिवंगत उपमुख्यमंत्री ने राकांपा गुटों के विलय की घोषणा के लिए 12 फरवरी की तारीख तय की थी। 

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस के माध्यम से एक जवाबी दावा सामने आया, जिन्होंने कहा कि अगर विलय की बातचीत सच में चल रही होती, तो अजित पवार ने इसके बारे में उनसे जानकारी सांझी की होती। दूसरी ओर, शरद पवार ने कहा, ‘‘विलय पर चर्चा अजित पवार और जयंत पाटिल के बीच हुई थी। सी.एम. फडऩवीस बातचीत में शामिल नहीं थे। उन्हें इस बारे में बात करने का क्या अधिकार था?’’ यह पूछे जाने पर कि क्या अब विलय होगा, शरद पवार ने कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता एक-दूसरे को समर्थन देना और बाद में तय करना है कि आगे कैसे बढऩा है।

कांग्रेस ने प. बंगाल में माकपा के लिए दरवाजे बंद किए : पश्चिम बंगाल में हाई-स्टेक विधानसभा चुनावों के लिए पूरी तरह से तैयारी है क्योंकि कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में चुनावी समझ के लिए माकपा हेतु अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं, आगामी विधानसभा चुनाव में सभी 294 सीटों पर चुनाव लडऩे का फैसला किया है, यह कहते हुए कि वामपंथी पार्टी के साथ सहयोग करने के पिछले अनुभव ने कैडर का मनोबल गिरा दिया है। यह फैसला पार्टी के शीर्ष नेताओं की पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डब्ल्यू.बी.पी.सी.सी.) के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। 

यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 10, राजाजी मार्ग स्थित आवास पर हुई और इसमें खरगे, पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल, राज्य प्रभारी गुलाम अहमद मीर, राज्य इकाई प्रमुख शुभंकर सरकार, वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी और सांसद ईशा खान चौधरी सहित अन्य लोग शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं का मानना था कि गठबंधन से कोई फायदा नहीं हुआ और उन्होंने लैफ्ट पर संसाधनों का दुरुपयोग करने और वोट ट्रांसफर न करने तथा टी.एम.सी. पर भी मनमानी करने का आरोप लगाया, जिससे सांझेदारी मुश्किल हो गई। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने वाम मोर्चे के साथ गठबंधन किया था और एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी।

ममता ने खोला कल्याणकारी योजनाओं का पिटारा : जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 करीब आ रहे हैं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 4.06 लाख करोड़ रुपए के अंतरिम राज्य बजट में कुछ बड़े वादे किए हैं, जिनका मकसद गिग वर्कर्ज, महिलाओं और बेरोजगार युवाओं के लिए कल्याणकारी सहायता को बढ़ाना है। मुख्य घोषणाओं में से एक इस साल फरवरी से लक्ष्मी भंडार योजना के तहत मासिक अनुदान में 500 रुपए की बढ़ौतरी थी, जिससे सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए भत्ता बढ़ाकर 1,500 रुपए और एस.सी./ एस.टी. महिलाओं के लिए 1,700 रुपए कर दिया गया है। राज्य ने इस योजना के लिए 15,000 करोड़ रुपए आबंटित किए हैं। 

इस कदम को सबसे बड़ा कल्याणकारी उपाय माना जा रहा है, खासकर महिलाओं के लिए, जो राज्य के लगभग आधे मतदाता हैं। यह योजना तृणमूल कांग्रेस सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम रही है। बांग्लार युवा साथी योजना की घोषणा में 21 से 40 वर्ष की आयु के बेरोजगार युवाओं को 5 साल तक या जब तक उन्हें रोजगार नहीं मिल जाता, जो भी पहले हो, प्रति माह 1,500 रुपए देने का वादा किया गया है। लाभों में सामाजिक रूप से प्रभावशाली आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्र्ताओं के अलावा नागरिक स्वयंसेवकों और पैरा-शिक्षकों के लिए 1,000 रुपए की बढ़ौतरी, भूमिहीन कृषि श्रमिकों के लिए 4,000 रुपए का वाॢषक भत्ता और गिग वर्कर्ज के लिए स्वास्थ्य बीमा भी शामिल है। इस बजट में, राज्य सरकार ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए 4 प्रतिशत डी.ए. या महंगाई भत्ते की घोषणा की है। सेवानिवृत्त राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी यह लाभ मिलेगा। एक बार फिर, ममता इस बात पर दाव लगा रही हैं कि कल्याणकारी योजनाएं, जो पहले से लागू हों, व्यक्तिगत हों और स्पष्ट रूप से वितरित की जाएं, वैचारिक प्रतिस्पर्धा पर हावी होंगी, जिससे चुनाव न केवल शासन पर, बल्कि कृतज्ञता पर एक जनमत संग्रह बन जाएगा।

पार्थ लेंगे राज्यसभा में मां की जगह : चर्चा है कि पार्थ पवार को नैशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (राकांपा) द्वारा राज्यसभा के लिए चुना जा सकता है। पार्थ ऊपरी सदन से सांसद के तौर पर अपनी मां और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की जगह ले सकते हैं। सुनेत्रा, जिन्होंने महायुति गठबंधन सरकार में अपने दिवंगत पति अजित पवार की जगह उपमुख्यमंत्री का पद संभाला है, से उम्मीद की जा रही है कि वह राज्यसभा सांसद के तौर पर अपनी सीट छोड़ देंगी और बारामती उपचुनाव लड़ेंगी। यह सीट 28 जनवरी को अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत के बाद खाली हुई थी। पार्थ चुनावी राजनीति में सक्रिय या सफल नहीं रहे हैं। वह 2019 में हार गए थे, जब उन्होंने लोकसभा चुनाव में मावल सीट से चुनाव लड़ा था।  इस बीच, महाराष्ट्र से राज्यसभा की 7 सीटें अप्रैल, 2026 में खाली होने वाली हैं। इनमें शरद पवार, राकांपा सांसद फौजिया खान, आर.पी.आई. (ए) प्रमुख रामदास अठावले, भाजपा के धैर्यशील पाटिल और भागवत कराड, कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल और शिवसेना यू.बी.टी. की प्रियंका चतुर्वेदी की सीटें शामिल हैं। 

सूत्रों के अनुसार, पार्थ को खास तौर पर शरद पवार की सीट में दिलचस्पी है क्योंकि यह एक नए पूरे कार्यकाल का मौका देती है। राकांपा के पास भी एक उम्मीदवार को स्वतंत्र रूप से चुनने के लिए पर्याप्त संख्या है, जिससे पार्थ की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं, अगर पार्टी नेतृत्व उनका समर्थन करता है। पर्यवेक्षक इस बात पर करीब से नजर रख रहे हैं कि क्या शरद पवार पार्थ की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे या परिवार और पार्टी के अंदरूनी मतभेद अगले राजनीतिक अध्याय को आकार देंगे।-राहिल नोरा चोपड़ा
 

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