Insurance Rules: बीमा मिस-सेलिंग पर IRDAI सख्त, एजेंटों के कमीशन पर लगाम की तैयारी

Edited By Updated: 28 Sep, 2026 12:19 PM

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बीमा पॉलिसी खरीदते समय ग्राहकों को उनकी जरूरत से अलग उत्पाद बेचे जाने की समस्या पर बीमा नियामक IRDAI ने सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। नियामक का मानना है कि एजेंटों को मिलने वाला शुरुआती भारी कमीशन मिस-सेलिंग की प्रमुख वजहों में से

नई दिल्लीः बीमा पॉलिसी खरीदते समय ग्राहकों को उनकी जरूरत से अलग उत्पाद बेचे जाने की समस्या पर बीमा नियामक IRDAI ने सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। नियामक का मानना है कि एजेंटों को मिलने वाला शुरुआती भारी कमीशन मिस-सेलिंग की प्रमुख वजहों में से एक है। IRDAI के चेयरमैन अजय सेठ के अनुसार, कुछ मामलों में पहले साल में 40-50% तक कमीशन मिलने से एजेंटों का जोर ग्राहक की जरूरत के बजाय बिक्री पूरी करने पर हो सकता है।

नियामक ने इस संबंध में एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। प्रस्तावित व्यवस्था में पहले साल मिलने वाले कमीशन को कम किया जा सकता है और एजेंट को कमीशन का एक हिस्सा पॉलिसी के रिन्यू होने पर देने की व्यवस्था की जा सकती है। इसका उद्देश्य एजेंटों को लंबे समय तक ग्राहकों के साथ जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करना है।

गलत पॉलिसी बेचने वालों पर निगरानी 

IRDAI गलत तरीके से पॉलिसी बेचने वाले एजेंटों और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर भी निगरानी बढ़ाने की योजना बना रहा है। इसके लिए एक सार्वजनिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री तैयार करने का प्रस्ताव है, जिसमें एजेंटों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के रिकॉर्ड तथा उनके खिलाफ मिली शिकायतों की जानकारी उपलब्ध हो सकती है।

लोन के साथ जबरन बीमा बेचने की शिकायतों पर भी नियामक ने चिंता जताई है। प्रस्तावित नियमों के तहत बैंक या लेंडर अपने जोखिम की सुरक्षा के लिए बीमा की मांग कर सकते हैं लेकिन बीमा प्रीमियम से कमीशन कमाने की व्यवस्था पर सवाल उठाया गया है। किसी भी बंडल्ड प्रोडक्ट में ग्राहक का स्पष्ट लाभ होना जरूरी होगा।

डार्क पैटर्न पर कसेगा शिकंजा

ऑनलाइन बीमा खरीदने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले ‘डार्क पैटर्न’ पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। ग्राहकों को केवल प्रीमियम जानने के लिए अनिवार्य रूप से मोबाइल नंबर देने या अनचाहे प्रचार कॉल प्राप्त करने जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित किया जा सकता है।

IRDAI के अनुसार, बीमा कंपनियों की लागत में कमी का लाभ ग्राहकों तक पहुंचना चाहिए। इससे लाइफ इंश्योरेंस में रिटर्न बेहतर होने और जनरल इंश्योरेंस में क्लेम रेशियो में सुधार की संभावना है। नए नियमों को अंतिम रूप देने के बाद इनके 1 जनवरी 2027 या 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की संभावना जताई गई है।

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