कोरोना वायरस करेगा खिलाड़ियों की पॉकेट पर अटैक

Edited By Updated: 10 Jun, 2020 12:06 PM

corona virus will attack players  pocket

कोरोना वायरस अब खिलाड़ियों की पॉकेट पर अटैक करेगा। खिलाड़ियों को खेल के लिए जहां किट्स की खरीदारी करना जरूरी होता है

चंडीगढ़ (अर्चना) : कोरोना वायरस अब खिलाड़ियों की पॉकेट पर अटैक करेगा। खिलाड़ियों को खेल के लिए जहां किट्स की खरीदारी करना जरूरी होता है वहीं फिट रहने के लिए पहले ही चार हजार रुपए हैल्दी डाइट खाने पर खर्च करना पड़ते हैं। अब खिलाड़ियों को खुद को वायरस से दूर रखने के लिए के करीब चार हजार रुपए सैनीटाइजर, मास्क और गलव्स की खरीदारी पर भी खर्च करना होंगे।

क्रिकेट, गोल्फ, टैनिस और शूटिंग जैसी खेलों पर भारी भरकम खर्च करने वाले महज 15 प्रतिशत खिलाड़ी होंगे, जबकि 85 प्रतिशत खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति पहले ही बेहतर नहीं है। कबड्डी,खो-खो जैसी खेलों को खेलने वाले खिलाड़ियों को भले खेलने के लिए कोई स्पोर्ट्स किट की जरूरत नहीं है, परंतु उन्हें भी डाइट के साथ-साथ स्वस्थ रहने के लिए सैनीटाइजर, मास्क और गलव्स तो खरीदने ही पड़ेंगे। 

खेल पर बुरा असर पड़ रहा : गिल 
श्री गुरु गोबिंद सिंह कालेज सैक्टर-26 के फिजिकल एजुकेशन के प्रोफैसर जी.एस. गिल का कहना है कि कोरोना वायरस का खेल जगत पर बुरा असर हो रहा है। हर खिलाड़ी खेल के मैदान में एशियन और ओलिंपिक गेम्स में खेलने का सपना लेकर आता है परंतु वायरस के खौफ की वजह से खिलाड़ियों की प्रैक्टिस पर बुरा असर पड़ा है। खेलने वालों के लिए खेल के बगैर रहना बड़ा ही मुश्किल हो रहा है। 

बॉडी टचिंग गेम्स कबड्डी, जुडो, कुश्ती तो सोशल डिस्टैंसिंग के नियम के चलते खेलने के बारे में सोच ही नहीं सकते। इंडिविजुअल गेम्स जैसे बैडमिंटन में शटल कॉक, टैनिस में बॉल का खेलने भी रिस्की हो सकता है क्योंकि दो लोग तो शटल कॉक और बॉल को शेयर करेंगे ही। ऐसे खेलों को मास्क पहनकर खेलना भी चुनौतीपूर्ण है।

खिलाड़ी जब भाग दौड़ करता है तो उसके शरीर को ऑक्सीजन की ज्यादा मात्रा की जरूरत होती है परंतु मास्क की वजह से खिलाड़ी जितनी कार्बन डाईऑक्साइड छोड़ता है, आधी सांस के साथ वापस ले लेता है। 

ऐसे में दौडऩे वाले खिलाडिय़ों को मास्क पहने बगैर दौड़ लगानी चाहिए वरना उनकी हैल्थ रिस्क पर आ सकती है। प्रो.गिल का कहना है कि सोशल डिस्टैंसिंग के दौर मे आर्चरी, शूटिंग जैसे खेल भी खेले जा सकते हैं और उनकी ट्रेनिंग भी ले सकते हैं।  

खिलाड़ी हैं परेशान :
प्रो. जी.एस. गिल की मानें तो खिलाड़ी खेल ना पाने की वजह से शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक स्तर पर प्रभावित होने लगे हैं। जिन्हें खेलने की आदत हो उनके शरीर पर न खेलने का असर होने लगता है, मानसिक तौर पर भी खिलाड़ी न खेल पाने की वजह से परेशान हैं। जो नैशनल व इंटरनैशनल स्तर पर प्रतियोगी खेल खेलना चाहते थे वह मन मसोस कर रह गए हैं। 

जब खेल शुरू हो भी जाएंगे तो कोरोना का रिस्क तो कई महीनों रहेगा ऐसे में खिलाड़ियों को डाइट के साथ सैनीटाइजर, मास्क और गलव्स की खरीददारी भी करनी होगी। सामान्य आहार पर जहां महीने के चार हजार रुपए खर्च आता है, तो स्पैशल डाइट पर करीब छह हजार रुपए खर्च आता है और अब वायरस से सुरक्षित रहने के लिए महीने के करीब चार हजार रुपए भी खर्च करना होंगे।

आर्चरी और शूटिंग  सेफ, टीम वाले गेम्स रिस्क :
स्पोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व एथलैटिक्स कोच सुखविंदर सिंह का कहना है कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग खेलों को लेकर एडवाइजरी जारी कर चुका है। फिलहाल कोई खेल नहीं खेला जा सकता। आर्चरी और शूटिंग जैसे खेल ही मौजूदा समय में खेले जा सकते हैं। 

टीम वाले खेल खेलना खिलाडिय़ों के लिए रिस्की हो सकते हैं। मास्क पहनकर दौडऩा, क्रिकेट, हॉकी, खो-खो, सॉट बॉल, हैंड बॉल खेलना भी रिस्की हो सकता है। खिलाड़ी फिट रहने के लिए एक्सरसाइज करते रहें।

 

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