Edited By Manisha,Updated: 28 Sep, 2026 05:40 PM

यहां पढ़ें कैसी है सीरीज हुंकार...
सीरीज- हुंकार (Hunkkaar)
स्टारकास्ट: अनीत पड्डा (Aneet Padda), फातिमा सना शेख (Fatima Sana Shaikh), मोहम्मद जीशान अय्यूब (Mohammed Zeeshan Ayyub), रघुबीर यादव (Raghubir Yadav), अर्जुन माथुर (Arjun Mathur), जोया हुसैन (Zoya Hussain), राम कपूर (Ram Kapoor), राजेश शर्मा (Rajesh Sharma), चारु शंकर (Charu Shankar), सीमा बिस्वास (Seema Biswas)
डायरेक्टर: करण डी कपाड़िया (Karan D Kapadia), नित्या मेहरा (Nitya Mehra)
रेटिंग-3*
Hunkkaar: ‘हुंकार’ एक सोशल-लीगल ड्रामा सीरीज है जो एक संवेदनशील और बड़े मामले के जरिए समाज, आस्था, प्रभावशाली लोगों की ताकत और न्याय व्यवस्था से जुड़े कई सवाल सामने रखती है। करण डी कपाड़िया और नित्या मेहरा के निर्देशन में बनी यह सीरीज अपने विषय को काफी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ पेश करती है। कहानी इंटेंस जरूर है, लेकिन इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे महज सनसनी पैदा करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया है। सीरीज की कहानी के साथ इसकी मजबूत स्क्रीनप्ले और कलाकारों की प्रभावशाली परफॉर्मेंस दर्शकों को जोड़े रखती है। तो चलिए जानते हैं कैसी है सीरीज...
कहानी
सीरीज की कहानी 17 साल की मीनू रावत के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक प्रभावशाली स्वयंभू बाबा सनिल चाकोसी उर्फ बापजी पर गंभीर आरोप लगाती है। मीनू बाबा के स्कूल में पढ़ती है और उनके आश्रम में रहती है जबकि उसके माता-पिता भी बाबा के अनुयायी हैं। मामला सामने आने के बाद इसकी चर्चा पूरे देश में होने लगती है और केस की जिम्मेदारी एसीपी जसलीन को सौंपी जाती है। वहीं, एक वकील मीनू को न्याय दिलाने की लड़ाई में उसका साथ देता है। इसके बाद कहानी सच सामने लाने की कोशिश, कानूनी प्रक्रिया और एक पीड़िता के लिए न्याय की राह में आने वाली मुश्किलों को सामने रखती है। अब इस सच्चाई को सामने लाने में क्या-क्या चीजे सामने आती है यह सब जानने के लिए आपको सीरीज देखनी होगी...

एक्टिंग
‘हुंकार’ की सबसे मजबूत कड़ी इसकी एक्टिंग है। अनीत पड्डा ने मीनू के किरदार में डर, दर्द, गुस्से और हिम्मत को बेहद सहज तरीके से पर्दे पर उतारा है। उनके कई सीन ऐसे हैं, जहां संवाद से ज्यादा उनकी आंखें भावनाओं को बयां करती हैं। रघुबीर यादव ने बापजी के किरदार को अपने अनुभव और सधी हुई अदाकारी से प्रभावशाली बनाया है। उनका सामान्य और शांत नजर आने वाला अंदाज किरदार को और भी जटिल बनाता है। फातिमा सना शेख भी अपनी भूमिका में मजबूत नजर आती हैं, जबकि मोहम्मद जीशान अय्यूब और बाकी सपोर्टिंग कलाकार कहानी को जरूरी मजबूती देते हैं। खास तौर पर अनीत पड्डा की परफॉर्मेंस सीरीज देखने के बाद लंबे समय तक याद रहती है।

निर्देशन
करण डी कपाड़िया और नित्या मेहरा ने सीरीज के संवेदनशील विषय को बिना जरूरत के ओवरड्रामेटिक बनाए संभालने की कोशिश की है। कहानी में तनाव बनाए रखने के साथ-साथ इसके सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है। मीनू के बार-बार बयान देने और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने वाले हिस्से कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें जिस तरह फिल्माया गया है उससे किरदार की स्थिति को समझने में मदद मिलती है। कुछ जगहों पर कहानी की रफ्तार थोड़ी धीमी महसूस हो सकती है, लेकिन मजबूत स्क्रीनप्ले और कलाकारों की परफॉर्मेंस इसकी पकड़ बनाए रखते हैं। कुल मिलाकर, ‘हुंकार’ एक गंभीर और कंटेंट-ड्रिवन सीरीज है, जो सिर्फ एक मामले की कहानी नहीं बताती, बल्कि आस्था, प्रभाव, समाज और न्याय व्यवस्था के बीच के जटिल रिश्ते पर भी दर्शकों को सोचने का मौका देती है।