ब्रेक फेल होने से एक्सीडेंट पर मिलेगा इंश्योरेंस क्लेम? सिक्किम हाईकोर्ट ने दिया अहम फैसला

Edited By Updated: 10 Sep, 2026 08:15 PM

will an insurance claim be available for an accident caused by brake failure

भारत में सड़क हादसे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। दुर्घटना के बाद पीड़ित या उसके परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बीमा क्लेम हासिल करना होता है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि अगर हादसा चालक की लापरवाही या तेज रफ्तार के कारण हुआ है, तभी...

नई दिल्ली : भारत में सड़क हादसे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। दुर्घटना के बाद पीड़ित या उसके परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बीमा क्लेम हासिल करना होता है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि अगर हादसा चालक की लापरवाही या तेज रफ्तार के कारण हुआ है, तभी बीमा कंपनी से मुआवजा मिल सकता है। लेकिन अगर अचानक वाहन का ब्रेक फेल हो जाए और इसी वजह से दुर्घटना हो जाए, तो क्या ऐसी स्थिति में भी पीड़ित को मुआवजा मिलेगा? इसी सवाल से जुड़े एक मामले में सिक्किम हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कुछ परिस्थितियों में चालक की लापरवाही साबित नहीं होने के बावजूद नो-फॉल्ट लायबिलिटी के तहत मुआवजा दिया जा सकता है।

ब्रेक फेल होने पर क्या है नियम?
अदालत के फैसले के मुताबिक, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 140 के तहत नो-फॉल्ट लायबिलिटी के आधार पर मुआवजे का दावा किया जा सकता है। ब्रेक फेल होना एक यांत्रिक खराबी हो सकती है और इसे हर स्थिति में चालक की जानबूझकर की गई लापरवाही नहीं माना जा सकता। ऐसी परिस्थितियों में बीमा कवरेज और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर पीड़ित या उसके परिवार के मुआवजे के दावे पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, किसी मामले में वास्तविक क्लेम पॉलिसी की शर्तों और लागू कानूनी प्रावधानों पर भी निर्भर करता है।

बीमा पॉलिसी की भाषा पर कोर्ट की टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस भास्कर राज प्रधान ने बीमा कंपनियों की ओर से जारी किए जाने वाले सर्टिफिकेट और पॉलिसी की भाषा को लेकर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि बीमा पॉलिसी के नियम और शर्तें इतनी स्पष्ट और सरल होनी चाहिए कि ग्राहक उन्हें आसानी से समझ सके। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि ग्राहकों को अपने अधिकार और बीमा कवरेज की सीमा समझने के लिए वेबसाइटों पर उपलब्ध जटिल और लंबे दस्तावेजों में भटकना नहीं पड़ना चाहिए। बीमा कंपनियों को पॉलिसी की शर्तों को पारदर्शी और स्पष्ट तरीके से बताना चाहिए।

IRDAI के नियम क्या कहते हैं?
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के नियमों के तहत बीमा पॉलिसी और सर्टिफिकेट में कवरेज की जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए। हालांकि, किसी दुर्घटना में क्लेम की पात्रता इस बात पर निर्भर करती है कि वाहन के पास किस प्रकार की पॉलिसी है और उसकी शर्तें क्या हैं। इसलिए वाहन मालिकों के लिए जरूरी है कि वे अपनी पॉलिसी में थर्ड-पार्टी, ओन-डैमेज और अन्य कवरेज की शर्तों को अच्छी तरह समझें।

ब्रेक फेल होने पर एक्सीडेंट हो जाए तो क्या करें?
अगर वाहन का ब्रेक फेल होने या किसी अन्य तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटना होती है, तो कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए। सबसे पहले स्थानीय पुलिस को सूचना देकर FIR और पंचनामा की प्रक्रिया पूरी कराएं। हादसे की सूचना तुरंत बीमा कंपनी को दें। वाहन की मैकेनिकल जांच कराएं और उसकी रिपोर्ट सुरक्षित रखें। दुर्घटना से जुड़े फोटो, वीडियो और अन्य जरूरी दस्तावेज संभालकर रखें। बीमा कंपनी के सामने क्लेम करते समय सभी संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करें। दुर्घटना की वजह और वाहन की तकनीकी स्थिति से जुड़े दस्तावेज क्लेम प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, मुआवजा मिलेगा या नहीं और कितनी राशि मिलेगी, यह संबंधित पॉलिसी, दुर्घटना की परिस्थितियों और लागू कानून के आधार पर तय होता है।

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