Edited By Prachi Sharma,Updated: 09 Oct, 2026 06:57 PM

Pakistan News : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लड़कियों के लापता होने के 500 से ज़्यादा मामले लंबित हैं। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (IGP) राव अब्दुल करीम ने बताया कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लड़कियों के लापता...
Pakistan News : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लड़कियों के लापता होने के 500 से ज़्यादा मामले लंबित हैं। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (IGP) राव अब्दुल करीम ने बताया कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लड़कियों के लापता होने के 500 से ज्यादा मामले अभी लंबित हैं।
पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, IGP लाहौर हाईकोर्ट में पेश हुए। वहां चीफ जस्टिस आलिया नीलम पंजाब के फैसलाबाद की रहने वाली सादिया हुसैन की याचिका पर सुनवाई कर रही थीं, जिन्होंने अपनी बेटी को वापस पाने की मांग की थी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान, नीलम ने IGP से पंजाब में लड़कियों के लापता होने से जुड़े मामलों की संख्या के बारे में पूछा। करीम ने अदालत को बताया कि पंजाब में ऐसे 500 से ज़्यादा मामले लंबित हैं। जज ने पूछा कि क्या पुलिस बच्चों और महिलाओं से जुड़े मामलों से निपटने के लिए किसी तरीके का इस्तेमाल कर रही है। जवाब में, राव अब्दुल करीम ने कहा कि इन मामलों से निपटने के लिए विशेष कमेटियां बनाई गई हैं।
'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, आलिया नीलम ने कहा कि पुलिस तभी सक्रिय दिखती है जब अदालतें ऐसे मामलों पर संज्ञान लेती हैं। उन्होंने बताया कि एक लड़की, जो दो साल से लापता थी, उसे तभी ढूंढा जा सका जब अदालत ने मामले पर ध्यान दिया। जज ने महिलाओं से जुड़े मामलों में पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई और IGP को लापता लड़कियों को खोजने के लिए पुलिस द्वारा की जा रही कोशिशों की रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया।
इस बीच, अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक प्रमुख संगठन ने बताया कि 2026 के पहले आठ महीनों में पंजाब के लाहौर में रेप के 498 और गैंग-रेप के 36 मामले सामने आए।
इन चिंताजनक आंकड़ों पर गहरी चिंता जताते हुए, 'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (VOPM) ने कहा कि इस डेटा का मतलब है कि हर दिन औसतन चार से ज़्यादा यौन अपराधों की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। “कोई भी इलाका इससे अछूता नहीं है। कोई भी समुदाय इससे बचा हुआ नहीं है। अगर अप्राकृतिक यौन संबंध (सोडोमी) के मामलों को भी इसमें शामिल किया जाए, तो आठ महीनों में यौन अपराधों के कुल मामलों की संख्या 1,108 तक पहुंच जाती है। यह अपराधों की ऐसी लहर नहीं है जो सिर्फ़ अंधेरी गलियों या हाशिए पर पड़े इलाकों तक ही सीमित हो। यह अमीर इलाकों, भीड़-भाड़ वाले बाजारों और शांत रिहायशी सड़कों पर भी हो रहा है। हिंसा हर जगह है और उसके साथ डर भी हर जगह है।
इस बात पर जोर देते हुए कि ये आंकड़े पूरी तस्वीर का सिर्फ़ एक हिस्सा दिखाते हैं, VOPM ने मानवाधिकार संगठनों का हवाला दिया। इन संगठनों ने बार-बार चेतावनी दी है कि दर्ज की गई FIR असल में हुए अपराधों का एक छोटा सा हिस्सा ही होती हैं।
बदनामी का डर, शर्म, परिवार का दबाव, पुलिस पर अविश्वास और समाज से बहिष्कृत किए जाने का डर अनगिनत पीड़ितों को चुप रहने पर मजबूर करता है। कई लोग तो कभी इसकी रिपोर्ट ही नहीं करते। कई लोगों को चुप रहने के लिए कहा जाता है। कई लोगों को ही दोषी ठहराया जाता है। दर्ज मामलों में बढ़ोतरी एक साथ दो बातें बता सकती है, अपराध ज़्यादा हुए हैं, और लोगों में बोलने की हिम्मत भी बढ़ी है। लेकिन ज़्यादा रिपोर्टिंग के बावजूद, सिस्टम उन लोगों की मदद करने में नाकाम रहता है जो सामने आते हैं।