किसानों के सवाल बड़े हैं या 2000 रुपए का सम्मान?

Edited By Anil dev, Updated: 26 Dec, 2020 01:24 PM

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नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन को करीब एक महीना हो गया है और अब भी हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर अपनी मांगों के साथ बैठे हुए हैं। किसानों और सरकार के बीच अब तक 6 दौर की बैठकें हो चुकी हैं लेकिन सभी बेनतीजा रहीं।

नेशनल डेस्क: नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन को करीब एक महीना हो गया है और अब भी हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर अपनी मांगों के साथ बैठे हुए हैं। किसानों और सरकार के बीच अब तक 6 दौर की बैठकें हो चुकी हैं लेकिन सभी बेनतीजा रहीं। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ की किस्त जारी की। उन्होंने एक बटन दबाकर नौ करोड़ किसान लाभार्थियों के खातों में 18,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए। इस योजना के किसानों के खाते में सीधे 2000 रुपये की रकम आ गई। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि दिल्ली में इतनी ठंड में पिछले एक महीने से बैठ किसानों की मांगे बड़ी है या फिर 2000 रुपये। 

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मोदी ने जारी की किसानों के लिए 18,000 करोड़ रुपये की राशि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आनलाइन तरीके से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत नौ करोड़ से अधिक किसानों के लिए 18,000 करोड़ रुपये की राशि जारी की। इसके जरिए किसानों के बैंक खाते में 2,000 रुपये सीधे हस्तांतरित किए गए। उन्होंने कहा, हमने एक हजार से अधिक मंडियों को आनलाइन एक दूसरे से जोड़ा है, इन मंडियों में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार पहले ही हो चुका है। उन्होंने कहा, हम गांवों में किसानों के जीवन को आसान बना रहे हैं। जो लोग आज बड़े बड़े भाषण दे रहे हैं जब वह सत्ता में थे तब उन्होंने किसानों के लिये कुछ नहीं किया। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने और अधिक फसलों को नयूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिया और किसानों को रिकार्ड धनराशि उपलब्ध कराई है। वहीं विशेषज्ञ किसान सम्मान निधि योजना को लेकर सवालिया निशान भी खड़ा कर रहे हैं। उनका कहना है कि क्या मोदी किसानों के खाते में डालकर उनकी आवाज को बंद करने की कोशिश कर रहे हैं। 

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संवाद फिर से शुरू होने के संकेत 
केंद्र के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान यूनियनों ने बातचीत के लिए सरकार की नयी पेशकश पर विचार के लिए शुक्रवार को बैठक की। संगठनों में से कुछ ने संकेत दिया कि वे मौजूदा गतिरोध का हल खोजने के लिए केंद्र के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला कर सकते हैं। यूनियनों ने कहा कि शनिवार को उनकी एक और बैठक होगी जिसमें ठहरी हुयी बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए केंद्र के न्यौते पर कोई औपचारिक फैसला किया जाएगा। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कहा कि सरकार को उम्मीद है कि अगले दौर की बैठक दो-तीन दिनों में हो सकती है। प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं में से एक ने नाम उजागर नहीं करने की इच्छा के साथ कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी की उनकी मांग बनी रहेगी।

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पानी की बौछारें, आंसू गैस भी किसानों को नहीं डरा सके
कृषि कानून के खिलाफ धरना पर बैठे हजारों किसानों को रोकने के लिए तमाम कोशिशें की गई हैं। किसान दिल्ली तक न पहुंचे इससे के लिए पानी की बौछारें, आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। और सड़कें खोद दी गई । इसके बाद भी दिल्ली को बढ़ रहे किसानों के हौंसले कम नहीं हुए। यह बात को स्पष्ट है कि जन-आंदोलन के दबाव में किसी एक भी मुद्दे पर समझौते का अर्थ यही होगा कि उन तमाम आर्थिक नीतियों की धारा ही बदल दी जाए जिन पर सरकार पिछले छह वर्षों से लगी हुई थी और जिनके जरिए वह फाइव ट्रिलियन इकॉनामी की ताकत दुनिया में क़ायम करना चाहती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मोदी सरकार किसानों की मांगो को मानती है या फिर यह आंदोलन ऐसे ही चलता रहेगा। 

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सरकार बता रही है कृषि बिल को अहम कदम
वहीं मोदी समेत पार्टी के कईं बड़े नेता कृषि बिल को अहम कदम बता चुके हैं। पीएम नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद जारी रहेगी, लेकिन किसानों को इस पर विश्वास नहीं हो रहा है। किसानों को लग रहा है सरकार उनकी कृषि मंडियों को छीनकर कॉरपोरेट कंपनियों को देना चाहती है। इसी के विरोध में किसान पिछले दो महीने से पंजाब में आंदोलन कर रहे हैं और अब वे दिल्ली आकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। 
 

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