GST में अगली पीढ़ी के सुधारों से कारोबार की सुगमता में होगी वृद्धि, बढ़ेगा भरोसा : PM मोदी

Edited By Updated: 05 Oct, 2026 05:58 PM

next generation gst reforms will boost ease of doing business and enhance confid

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के अगले चरण का समर्थन करते हुए कहा है कि प्रस्तावित बदलाव कर व्यवस्था को अधिक सरल बनायेंगे तथा कर दायित्वों को लेकर पूर्वानुमान लगाने में आसानी होगी। जीएसटी परिषद की बैठक 7 अक्टूबर को...

नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के अगले चरण का समर्थन करते हुए कहा है कि प्रस्तावित बदलाव कर व्यवस्था को अधिक सरल बनायेंगे तथा कर दायित्वों को लेकर पूर्वानुमान लगाने में आसानी होगी। जीएसटी परिषद की बैठक 7 अक्टूबर को होने जा रही है जिसमें इस अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधारों के अगले दौर पर चर्चा होने की उम्मीद है।

वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण की ‘एक्स' की एक टिप्पणी को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'अगली पीढ़ी की जीएसटी प्रणाली कराधान को अधिक सरल बनायेगी तथा उसके बारे में अनुमान लगाना और आसान होगा। इससे अनुपालन आसान होगा, रिफंड प्रक्रिया में सुधार आएगा और कारोबारियों को निवेश तथा विस्तार के लिए अधिक भरोसा मिलेगा। सरकार इन सुधारों को‘विकसित भारत'के लक्ष्य से जोड़कर देख रही है।' उन्होंने कहा कि सुधारों से कारोबारी इकाइयों और परिवारों को मदद मिल रही है। 

मोदी ने कहा कि ये सुधार आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, राजस्व को मजबूत करने और देशभर के उद्यमों के लिए नए अवसर पैदा करने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधारों के अगले चरण में अनुपालन को आसान बनाने और रिफंड प्रक्रिया को बेहतर करने पर ध्यान दिया जाएगा, जिससे कारोबारियों को निवेश और विकास के लिए अधिक विश्वास मिलेगा। इससे विकसित भारत की नींव और मजबूत होगी। पंजीकरण से लेकर रिफंड तक इसका अनुपालन आसान होगा।

वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण ने अपने पोस्ट में कहा कि जीएसटी सुधारों का अगला चरण पहले किए जा चुके बदलावों को आगे बढ़ाएगा और कर प्रणाली को करदाताओं के लिए अधिक अनुकूल बनाने पर केंद्रित होगा। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी के दोहरे उद्देश्यों-करदाताओं को राहत और अर्थव्यवस्था को अधिक गति-को पूरा किया जा रहा है। अगले चरण में पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, रिफंड, विवाद समाधान और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़े अनुपालन को सरल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का फोकस अब केवल जीएसटी दरों को अधिक तकर्संगत बनाने से आगे बढ़कर कर प्रशासन से जुड़ी प्रक्रियाओं में सुधार करने पर है। इसका उद्देश्य कारोबारियों और करदाताओं के लिए अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करना तथा कर व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाना है। सरकार ने पिछले वर्ष जीएसटी प्रणाली में बढ़े बदलाव किये थे।

जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक के फैसलों के तहत 22 सितंबर 2025 को जीएसटी ढांचे में बड़े बदलाव लागू किये गये और अधिकांश उत्पादों को पांच प्रतिशत तथा 18 प्रतिशत कर के अंतर्गत ला दिया गया। इसके साथ ही 28 प्रतिशत का क्षतिपूरक उपकर भी समाप्त कर दिया गया । जीएसटी की शुरुआत 1 जुलाई 2017 को हुई थी। इसके तहत केंद्र और राज्यों के कई अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत व्यवस्था में लाया गया और देश में एक साझा राष्ट्रीय बाजार तैयार किया गया। इसके बाद से जीएसटी दरों, प्रक्रियाओं और तकनीकी व्यवस्था में कई बदलाव किए जा चुके हैं। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जीएसटी के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 में करीब 66.5 लाख थी, जो मई 2026 तक बढ़कर 1.65 करोड़ हो गई। जीएसटी में सुधारों पर विचार के लिए जीएसटी परिषद की कानून संबंधी समिति ने जीएसटी कानूनों के अंतर्गत अपराधिक श्रेणी में रखे गये कृत्यों को गैर-आपराधिक बनाने और प्रवर्तन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव के प्रस्तावों पर विचार किया है। परिषद की इस समाप्त होने वाली बैठक में उस पर चर्चा हो सकती है।

इसमें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 69 के तहत उपलब्ध गिरफ्तारी की स्वतंत्र शक्ति को हटाने की संभावना भी शामिल है। वर्तमान में धारा 69 के तहत आयुक्त को ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने की अनुमति देने का अधिकार है, जिसके बारे में यह मानने के पर्याप्त कारण हों कि उसने सीजीएसटी अधिनियम की धारा 132 के तहत निर्धारित अपराध किया है। फर्जी इनवॉइस, फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने या उसका गलत इस्तेमाल करने जैसे गंभीर मामलों में इस प्रावधान का इस्तेमाल किया गया है। 

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