Edited By Tanuja,Updated: 23 Sep, 2026 02:53 PM

तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में फिर कश्मीर मुद्दा उठाया। उन्होंने दक्षिण एशिया के विवादों को बातचीत और संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के तहत सुलझाने की बात कही। भारत पहले भी कश्मीर पर एर्दोगन के...
New York: तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया। मंगलवार को अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के सभी विवादों, जिसमें कश्मीर भी शामिल है, का समाधान संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। एर्दोगन ने कहा, “दक्षिण एशिया में यह जरूरी है कि सभी विवादों, जिसमें कश्मीर मुद्दा भी शामिल है, को संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए सुलझाया जाए।” उनका यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में आया।
यह पहली बार नहीं है जब एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कश्मीर का उल्लेख किया है। उन्होंने 2025 में भी अपने संबोधन में कश्मीर के समाधान के लिए बातचीत और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का हवाला दिया था। भारत ने उस समय उनके बयान को खारिज करते हुए कहा था कि कश्मीर से जुड़े मुद्दे द्विपक्षीय रूप से सुलझाए जाने चाहिए और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। वहीं, 2024 में एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान जम्मू-कश्मीर का उल्लेख नहीं किया था। यह 2019 के बाद पहली बार था जब उन्होंने महासभा के अपने भाषण में इस मुद्दे को नहीं उठाया।
एर्दोगन ने 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर पर विस्तार से टिप्पणी की थी। इसके बाद उनके बयानों पर भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आती रही है। भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और भारत-पाकिस्तान के बीच लंबित मुद्दों को शांतिपूर्ण एवं द्विपक्षीय तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। नई दिल्ली तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करती। एर्दोगन का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब तुर्किये और पाकिस्तान के बीच रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग बढ़ा है। अगस्त 2026 में तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की बात कही गई।
वहीं, भारत और तुर्किये के संबंधों में भी पिछले कुछ समय में कश्मीर और पाकिस्तान के मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं। एर्दोगन की ताजा टिप्पणी इसी व्यापक कूटनीतिक पृष्ठभूमि में देखी जा रही है। एर्दोगन के भाषण में कश्मीर के अलावा गाजा, फिलीस्तीन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा भी प्रमुख रहा। उन्होंने सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग की और अधिक देशों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने की वकालत की। कश्मीर पर उनका ताजा बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत-पाकिस्तान संबंधों और दक्षिण एशिया की स्थिति पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।